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Religion

रक्त पीकर किया था राक्षस का संहार, जानिए मां दुर्गा क्यों बनीं कालरात्रि?

माता दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि का स्वरूप बेहद भयानक है। माता पार्वती ने यह स्वरूप रक्तबीज नामक राक्षस का अंत करने के लिए लिया था। इसको लेकर कई पौराणिक ग्रंथों में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं।

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Edited By : Mohit Tiwari Updated: Apr 3, 2025 23:26
mata kali

हिंदू धर्म में मां कालरात्रि को माता दुर्गा का सातवां स्वरूप माना गया है। मां का स्वरूप रात की तरह काला और बेहद भयानक है। मां कालरात्रि के नाम मात्र से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। मां कालरात्रि के बारे में कई प्राचीन कथाएं हमारे शास्त्रों में मिलती हैं।

मार्कंडेय पुराण और दुर्गा सप्तशती में मां के प्राकट्य की कथा देखने को मिलती है। नवरात्रि के 7वें दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जाता है। माता का यह स्वरूप भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है।

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रक्तबीज का किया था वध

एक कथा के अनुसार जब शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड और रक्तबीज नामक असुरों ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। उन्होंने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर इंद्रदेव को पराजित कर दिया और देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया था। इन दैत्यों के आतंक से पृथ्वी और स्वर्ग में चारों ओर हाहाकार मच गया। जब देवताओं को कोई उपाय नहीं सूझा, तो वे सभी मिलकर देवी दुर्गा के पास पहुंचे और उनसे रक्षा करने की प्रार्थना की। इस पर देवी दुर्गा ने चंड-मुंड का वध कर दिया।

जब बारी रक्तबीज की आई तब माता ने जब भी उस पर कोई भी प्रहार किया तो उसका रक्त निकलता और रक्त की बूंद जहां भी गिरती, वहां पर एक और रक्तबीज उत्पन्न हो जाता और उसकी संख्या बढ़ जाती थी। इस पर माता दुर्गा का क्रोध बढ़ गया और उनके क्रोध से भयंकर काले रंग की देवी प्रकट हुईं। इन देवी का रूप इतना अधिक विकराल और शक्तिशाली था कि सभी दिशाएं कांप उठीं।

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ऐसा था मां का स्वरूप

मां का रंग एकदम काला था। उनके बाल लंबे और बिखरे हुए थे। उनके तीसरे नेत्र से भयंकर आग निकल रही थी। वे गधे पर सवार थीं। उनके चारों हाथों में तलवार और जलती हुई मशाल, वरद मुद्रा और अभय मुद्रा थी। उनके तेज से ब्रह्मांड कांप उठा।

मां ने किया रक्तबीज का संहार

मां कालरात्रि रक्तबीज पर हमला किया और उसका जो भी रक्त निकला उसे मां ने अपनी लंबी जीभ से पी लिया। उन्होंने उस राक्षस के रक्त की एक भी बूंद नीचे नहीं गिरने दी। इससे नए रक्तबीज उत्पन्न नहीं हो पाए और उस राक्षस का अंत हो गया। रक्तबीज के बाद माता ने शुंभ-निशुंभ राक्षस का भी अंत किया।

पूजन से मिलती इन समस्याओं से मुक्ति

  • मां कालरात्रि के पूजन व्यक्ति सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है।
  • देवी के पूजन से शनि और राहु के दोष समाप्त हो जाते हैं।
  • माता के भक्त पर काले जादू और तंत्र मंत्र का प्रभाव नहीं हो पाता है।
  • मां कालरात्रि के भक्तों का शत्रु कुछ भी नहीं बिगाड़ पाते हैं। वे उनकी समस्त बाधाओं का अंत करती हैं।
  • मां कालरात्रि की आराधना से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Apr 03, 2025 11:26 PM

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