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Religion

Gurus of Hindu Epics: शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता भारत के 7 महान गुरु, जिनके शिष्य हैं महायोद्धा इतिहास-पुरुष

Gurus of Hindu Epics: रामायण, महाभारत और पुराण केवल कथा और युद्ध गाथा नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य की महान परंपरा का परिचय देते है. जिन महायोद्धाओं ने इतिहास रचा, उन्हें शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान किन गुरुओं से मिला? कौन थे वे आचार्य जिनकी शिक्षा ने वीरों का भविष्य बदला?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 2, 2026 15:07
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Gurus of Hindu Epics: रामायण और महाभारत भारतीय सभ्यता के ऐसे महाकाव्य हैं, जिनमे केवल युद्ध और वीरता की कथा नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और गुरु परंपरा की गहरी झलक मिलती है. इन ग्रंथो में वर्णित महायोद्धा अपनी शक्ति और शौर्य के लिए प्रसिद्ध हैं, परंतु उनके पीछे ऐसे गुरु थे, जिनके बिना यह सामर्थ्य संभव नहीं था.

ये गुरु केवल शस्त्र चलाना नहीं सिखाते थे, बल्कि शिष्यों को नीति, विवेक और जीवन का उद्देश्य भी समझाते थे. उनकी शिक्षा ने व्यक्तित्व को गढ़ा और इतिहास की दिशा तय की. आइए रामायण और महाभारत से पुराण तक तक के 7 महान गुरुओं के बारे में जानते है, जिनका ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक है.

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द्रोणाचार्य: धनुर्वेद के आचार्य

गुरु द्रोणाचार्य महाभारत के महान धनुर्वेदाचार्य माने जाते हैं. उन्होने अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर, दुर्योधन और अश्वत्थामा जैसे शिष्यो को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी. उनका शिक्षण केवल युद्ध तक सीमित नहीं था. अर्जुन की असाधारण धनुर्विद्या उनके कठोर प्रशिक्षण का परिणाम थी. वे शिष्यो में अनुशासन, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति निष्ठा भी विकसित करते थे.

परशुराम: अमोघ अस्त्रों के ज्ञाता

परशुराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता महर्षि जमदग्नि से और युद्ध कला का ज्ञान महादेव से प्राप्त किया. भीष्म पितामह, सूर्यपुत्र कर्ण और गुरु द्रोणाचार्य जैसे महान योद्धा उनके शिष्य रहे. वे शक्ति के साथ संयम का महत्व भी सिखाते थे.

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बृहस्पति: देवताओं के नीति गुरु

देव गुरु बृहस्पति को देवताओं का मार्गदर्शक माना जाता है. वे धर्मशास्त्र, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र और शासन व्यवस्था के महान ज्ञाता थे. कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देना उनका प्रमुख कार्य था. उनका ज्ञान युद्ध से अधिक संतुलन और नीति पर आधारित था.

शुक्राचार्य: संजीवनी विद्या के आचार्य

महापुराणों के अनुसार शुक्राचार्य दैत्यों के गुरु थे. उन्हें संजीवनी विद्या का ज्ञान प्राप्त था, जो देवगुरु बृहस्पति के पास भी नहींं था. वे कूटनीति, रणनीति और व्यवहारिक बुद्धि में निपुण थे. उनके मार्गदर्शन में दैत्य केवल बलवान ही नहींं, बल्कि चतुर भी बने.

विश्वामित्र: तप से ब्रह्मऋषि तक

महर्षि विश्वामित्र पहले राजा थे, जिन्होंने कठोर तपस्या के बल पर ब्रह्मऋषि पद प्राप्त किया. उन्होंने राम और लक्ष्मण को दिव्य और अचूक अस्त्रों का ज्ञान दिया. उनका जीवन यह दर्शाता है कि साधना और संकल्प से व्यक्ति अपना स्तर बदल सकता है.

वेद व्यास: गुरुओं के गुरु

वेद व्यास को गुरुओं का गुरु कहा जाता है. उन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत की रचना की. शुकदेव, पांडव और धृतराष्ट्र उनके शिष्य माने जाते हैं. उनका उद्देश्य ज्ञान को सरल रूप में समाज तक पहुंचाना था.

महर्षि वशिष्ठ: योग और विवेक के प्रतीक

महर्षि वशिष्ठ महान ब्रह्मऋषि और राजगुरु थे. उनकी प्रेरणा से ही भागीरथ मां गंगा को पृथ्वी पर लाने में सफल हुए. योगबल और ब्रह्मज्ञान के कारण वे विश्वामित्र जैसे तपस्वी को भी संतुलन का मार्ग दिखा सके. भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न इन्हीं में शिष्य थे.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 02, 2026 03:07 PM

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