Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य देश के योग्य सलाहकार और महान राजनेता होने के साथ-साथ कुशल कूटनीतिज्ञ भी थे। उन्हें मानव जीवन से जुड़ी तमाम समस्याओं से निकलने के दांव-पेंच आते थे। वो प्रत्येक परिस्थिति को पहले ही भांप लेते थे। लोगों की मदद करने के लिए उन्होंने अपने इसी ज्ञान से “चाणक्य नीति शास्त्र” की रचना की थी। चाणक्य नीति शास्त्र की किताब में उन्होंने प्रेम, संबंध, नौकरी, करियर, सफलता, बुरी संगत और दोस्तों के अच्छे और बुरे दोनों पहलू के बारे में विस्तार से बताया है।
आज हम आपको चाणक्य के एक श्लोक के माध्यम से व्यक्ति की उन तीन अच्छी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अगर मनुष्य में हैं, तो उनके ऊपर बुरी संगत और आसपास के लोगों की गलत आदतों का थोड़ा-सा भी प्रभाव नहीं होगा। चलिए जानते हैं उन्हीं अच्छी आदतों के बारे में।
वाचः शौचं च मनसः शौचंमिन्द्रियनिग्रहः।
सर्वभूते दया शौचं एतच्छौचं पराऽर्थिनाम् ॥
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है कि जिन लोगों की मीठी वाणी यानी जो लोग हर समय दोस्तों व परिवारवालों से अच्छा व्यवहार करते हैं। कभी भी कोई ऐसी बात नहीं कहते हैं, जिससे सामने वाले का मन दुखी हो और उसे गुस्सा आए। ऐसे लोगों की आत्मा इतनी ज्यादा साफ होती है कि इन लोगों पर बुरी संगत को थोड़ा-सा भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
मीठी बोली के अलावा मन की शुद्धता भी बहुत जरूरी है। चाणक्य के अनुसार, जिन लोगों का मन शुद्ध होता है, जिनके मन में लालच, कपट, धोखाधड़ी और जलन का भाव नहीं होता है। अगर वो बुरी से बुरी संगत में भी रहते हैं, तो उन पर गलत संगत का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अपने मन को शुद्ध रखना चाहिए।
मीठी बोली और मन की शुद्धता के अलावा हर एक व्यक्ति को अपनी भावनाओं को वश में रखना भी आना चाहिए। इससे न तो उन पर बुरी संगत का प्रभाव पड़ेगा और न ही उनके मन में गलत विचार आएंगे। साथ ही आप शांति से मन लगाकर अपने लक्ष्य के प्रति मेहनत कर पाएंगे। इससे आपको जल्दी सफलता मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।