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समुद्र में गैस और तेल ढोने वाले बड़े जहाजों की सामान्य रफ्तार 37 से 46 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहती है. इन जहाजों को खास तौर पर इसी स्पीड के लिए डिजाइन किया जाता है ताकि वे भारी वजन के साथ सुरक्षित चल सकें.
स्लो स्ट्रीमिंग स्पीड का इस्तेमाल जहाज कब और क्यों करते हैं?

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जब जहाजों को ईंधन और पैसों की बचत करनी होती है तो वे 33 से 37 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलते हैं. इस धीमी गति से चलने पर तेल कम खर्च होता है लेकिन मंजिल तक पहुंचने में समय थोड़ा ज्यादा लग जाता है.
एक्स्ट्रा स्लो स्ट्रीमिंग स्पीड को किफायती क्यों माना जाता है?

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27 से 33 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार को सुपर स्लो या किफायती गति कहा जाता है जिसका इस्तेमाल कम दूरी के लिए होता है. इसमें ईंधन की खपत सबसे कम होती है और यह उन मौकों पर अपनाई जाती है जब डिलीवरी की कोई जल्दबाजी नहीं होती.
जहाजों की सबसे धीमी यानी मिनिमल कॉस्ट स्पीड क्या होती है?

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22 से 27 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड को मिनिमल कॉस्ट कहा जाता है जो किसी भी जहाज की सबसे धीमी रफ्तार होती है. बहुत ज्यादा समय लगने के कारण समुद्री रास्तों पर चलने वाले टैंकर इस स्पीड का इस्तेमाल बहुत ही कम मौकों पर करते हैं.
कतर से भारत आने वाले नंदा देवी जहाज ने कितनी गैस सप्लाई की है?

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हाल ही में कतर से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर नंदा देवी नाम का एलपीजी टैंकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर सुरक्षित पहुंचा है. यह विशाल जहाज अपने साथ करीब 46000 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आया है जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है.
क्या जहाज की बनावट और आकार उसकी रफ्तार पर असर डालते हैं?

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समुद्र में किसी भी शिप की तेजी उसके डिजाइन और उसमें लदे भारी कंटेनरों के कुल वजन पर पूरी तरह निर्भर करती है. तेल और गैस के टैंकरों को उनकी श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग गति पर चलाने के लिए ही तैयार किया जाता है.