प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के दौरे के दूसरे चरण में रविवार रात स्लोवाकिया पहुंचे. वो यहां 16 जून तक रहेंगे. राजधानी ब्रातिस्लावा में होटल पहुंचने पर पीएम मोदी का लोगों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया. बड़ी संख्या में पहुंचे भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी-मोदी और भारत माता की जय के नारे लगाए. इस दौरान हर कोई बेहद उत्साहित नजर आया.
ब्रेड और नमक भेंट कर किया पीएम मोदी का स्वागत

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स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और उन्हें पारंपरिक स्लोवाक रीति के मुताबिक ब्रेड और नमक भेंट किया गया, जो वहां सम्मान, सद्भावना और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है. पीएम ने हाथ जोड़कर उसे स्वीकार किया. इस ब्रेड और नमक ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा.आइये जानते हैं इस अनोखी परंपरा के बारे में.
स्लोवाक संस्कृति की परंपरा

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स्लोवाक संस्कृति में ब्रेड और नमक के साथ पारंपरिक स्वागत मेहमाननवाज़ी, सम्मान और सद्भावना का प्रतीक है. जानकारी के मुताबिक स्लोवाक और अन्य स्लाव संस्कृतियों में सम्मानित मेहमान का स्वागत ताजा बनी ब्रेड और नमक की छोटी कटोरी से करना मेहमाननवाज़ी, सम्मान और सद्भावना का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है.
ब्रेड और नमक क्यों है अहम

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परंपरा के अनुसार ब्रेड समृद्धि, जीवन-निर्वाह और धरती की नेमतों को मिल-बांटकर इस्तेमाल करने का प्रतीक है, जबकि नमक मूल्य, अटूट दोस्ती और सुरक्षा का प्रतीक है. किसी मेहमान को ब्रेड और नमक देना वहां सबसे बड़े सम्मान और अपनापन दिखाने की परंपराओं में शामिल है. इस रीति-रिवाज की जड़ें स्लाव परंपराओं में गहरी हैं. यह दिखाता है कि स्लोवाक लोग दूसरों का गर्मजोशी से स्वागत करने और घर एवं समुदाय की खुशियों को साझा करने को कितना महत्व देते हैं.
पीएम मोदी ने शेयर किया पोस्ट

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प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा ‘कल शाम ब्रातिस्लावा में मिला स्वागत सचमुच बहुत खास था. मैं भारतीय समुदाय के स्नेह और गर्मजोशी के लिए उनका आभारी हूं. ऐसे भाव उन मज़बूत रिश्तों को दर्शाते हैं जो हमारे लोगों को जोड़ते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत बनाते हैं’.
इन देशों में भी यह रीति-रिवाज प्रचलित

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अब सवाल उठता है कि क्या ब्रेड और नमक से मेहमानों का स्वागत करने की परंपरा सिर्फ स्लोवाकिया में ही है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. स्लोवाकिया के अलावा भी कई देशों में यह रीति-रिवाज प्रचलित है. रूस, यूक्रेन, पोलैंड, स्लोवाकिया और सर्बिया जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों में यह रिवाज मेहमान को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है.