जंग में ईरान से क्या-क्या लेते थे मुगल? जानिए इतिहास का छिपा सच

Mughal Iran War Support History: इतिहास के पन्नों में छिपी एक दिलचस्प कहानी, जब मुगल बादशाह युद्ध के समय ईरान से खास मदद लेते थे, जिससे उनकी ताकत और रणनीति दोनों मजबूत हो जाती थीं.

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Mughal Connection To Iran During War: आज भले ही ईरान युद्ध की चर्चा में हो, लेकिन इतिहास गवाह है कि मुगलों के लिए यह देश सबसे बड़ा मददगार रहा है. शाहजहां और औरंगजेब के दौर में ईरान से केवल हथियार ही नहीं, बल्कि शाही शान-शौकत का हर सामान भारत आता था.

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मुगल फौज की असली ताकत

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मुगल सेना की रीढ़ कहे जाने वाले अरबी और ईरानी घोड़े कज़्वीन और खुरासान से मंगाए जाते थे. ये घोड़े भारतीय नस्ल से कहीं ज्यादा मजबूत और तेज थे, जिनके बिना मुगलों का घुड़सवार दस्ता अधूरा रहता था.

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ईरान से आई तोप और तलवारें

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मुगल तोपखाने में बारूद और तोप ढालने की कला ईरानी कारीगरों की देन थी. वहां से नक्काशीदार हेलमेट, विशेष ढाल और बेहतरीन तलवारें मंगवाई जाती थीं, जो युद्ध में इनाम के तौर पर भी दी जाती थीं.

हकीमों और किताबों का गहरा नाता

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मुगल दरबार के वैद्य और हकीम ईरानी चिकित्सा ग्रंथों और नुस्खों पर काफी भरोसा करते थे. इसी व्यापारिक रिश्ते के कारण ईरान से विशेष औषधियां और फारसी की दुर्लभ हस्तलिखित किताबें भारत आती थीं.

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कालीन और रेशम का जलवा

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मुगल महलों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्फ़हान के रेशमी कालीन और कीमती कपड़े मंगवाए जाते थे. ईरानी कलाकारों और पेंटिंग्स ने मुगल दरबार की संस्कृति और कला को एक नई ऊंचाई दी थी.

कंधार का रास्ता

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भारत और ईरान के बीच व्यापार का सबसे अहम रास्ता कंधार था, जिस पर कब्जे के लिए कई जंगें हुईं. इसी रास्ते से होकर सूखे मेवे और कांच के बर्तन भारत आते थे और बदले में यहां से मसाले भेजे जाते थे.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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