दुनिया में कई ऐसे खतरनाक पर्वत हैं जहां चढ़ाई करना मौत को दावत देने जैसा माना जाता है. इन पहाड़ों ने अब तक सैकड़ों पर्वतारोहियों की जान ली है. कहीं बर्फीले तूफान मौत बनकर टूटते हैं तो कहीं हिमस्खलन पलभर में पूरी टीम को निगल जाता है. आइए जानते हैं दुनिया के 5 सबसे खतरनाक और रहस्यमयी पहाड़ों के बारे में.
अन्नपूर्णा-I: दुनिया का सबसे घातक पर्वत

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अन्नपूर्णा-I को दुनिया के सबसे खतरनाक पर्वतों में गिना जाता है. नेपाल में मौजूद ये पर्वत 8,091 मीटर ऊंचा है. पर्वतारोहियों के बीच इसकी पहचान एक ऐसे शिखर के रूप में है जहां मौत का खतरा बेहद ज्यादा रहता है. यहां बार-बार आने वाले हिमस्खलन और खराब मौसम की वजह से कई मिशन फेल हुए हैं. अन्नपूर्णा की दक्षिणी दीवार को पर्वतारोहण की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक माना जाता है. सालों से ये पर्वत सैकड़ों पर्वतारोहियों के लिए जानलेवा साबित हुआ है.
K2: ‘सेवेज माउंटेन’ का खौफ

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पाकिस्तान और चीन की सीमा पर मौजूद K2 दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत है. इसकी ऊंचाई 8,611 मीटर है, लेकिन इसे एवरेस्ट से भी ज्यादा कठिन माना जाता है. K2 पर चढ़ाई के दौरान तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और खतरनाक चट्टानी रास्ते पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं. यही वजह है कि इसे ‘सेवेज माउंटेन’ यानी क्रूर पर्वत कहा जाता है. यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है और कई पर्वतारोही हमेशा के लिए बर्फ में समा चुके हैं.
नंगा पर्वत: ‘द किलर माउंटेन’

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पाकिस्तान में मौजूद नंगा पर्वत 8,126 मीटर ऊंचा है. इसे लंबे समय से ‘किलर माउंटेन’ कहा जाता है. इसकी विशाल रुपाल फेस दुनिया की सबसे ऊंची पर्वतीय दीवारों में शामिल है. यहां तेज बर्फीले तूफान, खतरनाक ढलान और बेहद कठिन चढ़ाई पर्वतारोहियों के लिए बड़ी चुनौती बनती है. शुरुआती अभियानों में बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों की मौत के बाद इस पर्वत की खौफनाक पहचान बनी.
माउंट एवरेस्ट: सबसे ऊंचा लेकिन बेहद खतरनाक

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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर से ज्यादा है. हर साल सैकड़ों लोग इसे फतह करने निकलते हैं, लेकिन कई कभी वापस नहीं लौट पाते. ऑक्सीजन की कमी, हड्डियां गलाने वाली ठंड, भीड़भाड़ और अचानक बदलता मौसम यहां मौत का कारण बनते हैं. एवरेस्ट पर आज भी कई पर्वतारोहियों के शव बर्फ में जमे हुए हैं, जिन्हें नीचे लाना मुमकिन नहीं हो पाया.
रूपकुंड: ‘स्केलेटन लेक’

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उत्तराखंड में मौजूद रूपकुंड झील समुद्र तल से करीब 5,000 मीटर की ऊंचाई पर है. इसे ‘स्केलेटन लेक’ यानी कंकाल झील कहा जाता है. यहां बर्फ पिघलने पर सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देते हैं. रिसर्चर्स बताते हैं कि इन लोगों की मौत सदियों पहले किसी भयंकर प्राकृतिक आपदा में हुई थी.
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