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ईरान जंग के बीच चर्चा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की नजर होर्मुज के पास स्थित तीन छोटे द्वीपों पर टिकी है. अबू मूसा, ग्रेटर टंब्स और लेसर टंब्स नाम के ये द्वीप सामरिक नजरिए से बेहद खास माने जाते हैं.
फारस की खाड़ी में स्थित ये तीनों द्वीप दुनिया के लिए क्यों अहम हैं?

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ये द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित हैं जहाँ से गुजरने वाले हर तेल टैंकर पर नजर रखी जा सकती है. फिलहाल इन पर ईरान का कंट्रोल है लेकिन यूएई लंबे समय से इन पर अपना दावा जताता रहा है.
इन द्वीपों को लेकर यूएई और ईरान के बीच क्या पुराना विवाद है?

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अबू मूसा द्वीप यूएई के शारजाह से महज 59 किलोमीटर दूर है और इसका विवाद संयुक्त राष्ट्र तक भी जा चुका है. ईरान-इराक युद्ध के दौरान सद्दाम हुसैन ने भी इन्हें छीनने की कोशिश की थी पर वह नाकाम रहे थे.
अमेरिका इन द्वीपों पर कब्जा करके कौन से दो बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहता है?

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पहला लक्ष्य ईरान को सौदेबाजी की मेज पर लाकर उसका होर्मुज से दबदबा खत्म करना है. दूसरा बड़ा कारण युद्ध में भारी नुकसान झेलने वाले अपने साथी देश यूएई को खुश करना और उसे सुरक्षा देना है.
क्या जंग के बीच यूएई ने अमेरिका से कोई खास गुहार लगाई है?

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खबरों के मुताबिक यूएई चाहता है कि फारस की खाड़ी में ईरान का वर्चस्व पूरी तरह खत्म हो जाए. यूएई पर अब तक करीब 2000 हमले हो चुके हैं इसलिए वह इन द्वीपों पर अमेरिका का साथ चाहता है.
क्या ट्रंप की नई रणनीति से मिडिल ईस्ट में बड़ी उथल-पुथल मच सकती है?

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जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका इन द्वीपों को अपने हाथ में लेता है तो ईरान की घेराबंदी और भी सख्त हो जाएगी. इससे न सिर्फ तेल की सप्लाई लाइन सुरक्षित होगी बल्कि ईरान की सैन्य शक्ति को भी करारी चोट पहुंचेगी.