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समुद्री माइंस पानी के नीचे बिछाए गए ऐसे विस्फोटक उपकरण हैं, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल होते हैं. इसका इतिहास सदियों पुराना है और आज भी ये नौसैनिक युद्ध में सबसे सस्ती और मारक हथियार मानी जाती है.
होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान का डर

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दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा माइंस बिछाने की खबरों ने वैश्विक बाजार में हाहाकार मचा दिया है. हालांकि ईरान ने इसका खंडन किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उसके पास हजारों घातक माइंस का भंडार मौजूद है.
कैसे काम करते हैं ये समुद्री बम

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आधुनिक माइंस में 100 से 1000 किलोग्राम तक विस्फोटक होता है, जो टकराने या जहाज की आवाज और चुंबकीय क्षेत्र से सक्रिय हो जाता है. इनके फटने से पैदा हुई शॉकवेव और गैस के बुलबुले विशालकाय जहाजों को भी दो टुकड़ों में फाड़ देते हैं.
इतिहास की सबसे बड़ी तबाही

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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन स्टार्वेशन' के तहत अमेरिका ने 12,000 माइंस बिछाकर जापान के 650 जहाजों को डुबो दिया था. आज भी यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी और पुराने युद्धों की वजह से बाल्टिक सागर में हजारों माइंस सक्रिय हैं.
माइंस के प्रमुख प्रकार और तकनीक

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कॉन्टैक्ट माइंस सीधे टकराव से फटती हैं, जबकि इन्फ्लुएंस माइंस जहाज के दबाव या इंजन की आहट सुनकर सक्रिय होती हैं. बॉटम माइंस समुद्र की गहराई में छिपी रहती हैं, जिससे इनका पता लगाना और इन्हें निष्क्रिय करना बेहद मुश्किल होता है.
बचाव की चुनौती और आधुनिक समाधान

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हालांकि आज के दौर में माइंस का पता लगाने वाले विशेष जहाज मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में बिछी माइंस को साफ करने में हफ्तों लग जाते हैं. इनका खौफ इतना ज्यादा है कि सिर्फ इनके बिछाए जाने की खबर ही समुद्री व्यापार को पूरी तरह ठप कर सकती है.