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कच्चे तेल को रिफाइनरी के अंदर बहुत ऊंचे तापमान पर उबाला जाता है जिससे अलग-अलग ईंधन निकलते हैं. पेट्रोल कम तापमान पर भाप बनकर ऊपर इकट्ठा हो जाता है जबकि डीजल के लिए ज्यादा गर्मी की जरूरत होती है.
क्या रिफाइनिंग की लागत दोनों ईंधनों के लिए एक जैसी होती है?

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पेट्रोल और डीजल को शुद्ध करने की मशीनी प्रक्रिया और उनमें लगने वाली मेहनत पूरी तरह अलग होती है. डीजल से सल्फर निकालने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है जिससे इसकी प्रोडक्शन कोस्ट पर असर पड़ता है.
एक बैरल कच्चे तेल से कितनी मात्रा में तेल निकलता है?

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हैरानी की बात यह है कि एक ही बैरल क्रूड ऑयल से पेट्रोल के मुकाबले डीजल की मात्रा थोड़ी ज्यादा निकलती है. लेकिन इसके बावजूद बाजार में दोनों की कीमतों का गणित सप्लाई और डिमांड के हिसाब से बदलता रहता है.
भारत में पेट्रोल हमेशा डीजल से महंगा क्यों बना रहता है?

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भारत में कीमतों के बड़े अंतर की सबसे मुख्य वजह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला भारी टैक्स है. सरकार पेट्रोल को निजी उपयोग का ईंधन मानती है इसलिए इस पर एक्साइज ड्यूटी और वैट ज्यादा वसूला जाता है.
डीजल की कीमतों को कम रखने के पीछे सरकार की क्या सोच है?

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डीजल का इस्तेमाल ज्यादातर खेती के कामों और माल ढोने वाले ट्रकों में होता है इसलिए इसे सस्ता रखा जाता है. अगर डीजल की कीमत अचानक बहुत बढ़ जाए तो बाजार में फल और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.
क्या भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दामों का अंतर खत्म हो जाएगा?

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पिछले कुछ सालों में सरकार ने डीजल पर से सब्सिडी कम कर दी है जिससे अब पेट्रोल और डीजल के रेट लगभग बराबर आने लगे हैं. आने वाले समय में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आने से इन दोनों ईंधनों की कीमतों में और भी बड़े बदलाव दिख सकते हैं.