समुद्र में 'बर्ड फ्लू' का कहर, PHOTOS में देखें कैसे हजारों सील और सी लायंस की मौत से मचा हड़कंप

1996 में एक पोल्ट्री फार्म से शुरू हुआ बर्ड फ्लू (H5N1) अब दुनिया के महासागरों तक पहुंच चुका है. दक्षिण अमेरिका से लेकर कैलिफोर्निया के तटों तक हजारों की संख्या में समुद्री जीव काल के गाल में समा रहे हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस न केवल समुद्री स्तनधारियों को खत्म कर रहा है, बल्कि पूरे समुद्री इकोसिस्टम के लिए एक अभूतपूर्व खतरा बन गया है.

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1996 में एक पोल्ट्री फार्म से शुरू हुआ बर्ड फ्लू (H5N1) अब दुनिया के महासागरों तक पहुंच चुका है. दक्षिण अमेरिका से लेकर कैलिफोर्निया के तटों तक हजारों की संख्या में समुद्री जीव काल के गाल में समा रहे हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस न केवल समुद्री स्तनधारियों को खत्म कर रहा है, बल्कि पूरे समुद्री इकोसिस्टम के लिए एक अभूतपूर्व खतरा बन गया है.

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पोल्ट्री से समुद्र तक का सफर

पोल्ट्री से समुद्र तक का सफर2 / 6

30 साल पहले पक्षियों में पाया गया H5N1 वायरस अब 400 मिलियन से अधिक मुर्गियों को संक्रमित करने के बाद जंगली समुद्री जीवों तक पहुंच गया है.

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दक्षिण अमेरिका में भारी तबाही

दक्षिण अमेरिका में भारी तबाही3 / 6

अकेले दक्षिण अमेरिका के तटों पर अब तक 36,000 से अधिक सी लायंस और 17,000 से ज्यादा एलीफेंट सील्स की मौत हो चुकी है. समुद्री जीवों की इतनी बड़ी संख्या में मौत समुद्री किनारों के पूरे इकोसिस्टम को बदल सकती है, जिससे अन्य प्रजातियों पर भी खतरा मंडरा रहा है.

अर्जेंटीना चेतावनी का केंद्र

अर्जेंटीना चेतावनी का केंद्र4 / 6

2023 में अर्जेंटीना में एलीफेंट सील्स की सामूहिक मौत ने वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया कि यह वायरस अब दुनिया भर में फैलने वाला है.

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वैज्ञानिकों की बड़ी चिंता

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यूसी डेविस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इन्फ्लूएंजा लगातार अपना रूप बदल रहा है, जिससे इसे नियंत्रित करना और भी कठिन होता जा रहा है. कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने एलीफेंट सील्स में वायरस का पता चलते ही त्वरित निगरानी शुरू की, ताकि इसके प्रसार को समय रहते रोका जा सके.

फंडिंग की जरूरत

फंडिंग की जरूरत6 / 6

विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों की लंबी अवधि तक निगरानी के लिए निरंतर फंडिंग और सरकारों के बीच आपसी तालमेल अनिवार्य है. अब थर्मल इमेजिंग और सैटेलाइट डेटा जैसी तकनीकों का उपयोग जानवरों के असामान्य व्यवहार को ट्रैक करने और बीमारी को पहले पकड़ने के लिए किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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