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आपने अक्सर सड़कों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काले रंग के Fortuner काफिले को देखा होगा. इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के काफिले भी अक्सर नजर आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इन VVIP गाड़ियों में न तो व्हील कवर लगे होते हैं और न ही आमतौर पर एलॉय व्हील्स दिखते हैं? इसके पीछे एक खास वजह है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

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प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के काफिले हमेशा हाई-सिक्योरिटी में चलते हैं. इन गाड़ियों का चयन सिर्फ लग्जरी या लुक के आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे को ध्यान में रखकर किया जाता है. Fortuner जैसी मजबूत और भरोसेमंद SUV इसी वजह से VVIP फ्लीट का हिस्सा होती हैं.

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व्हील कवर न लगाने की खास वजह- अगर ध्यान से देखें तो VVIP वाहनों में अक्सर व्हील कवर नहीं होते. यह कोई डिजाइन का फैसला नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा अहम कारण है. व्हील कवर चलते समय ढीले होकर निकल सकते हैं या टूट सकते हैं, जिससे अचानक गाड़ी असंतुलित हो सकती है और यह VVIP के लिए खतरा बन सकता है.

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सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता- VVIP गाड़ियों में हर छोटी से छोटी चीज को सुरक्षा के नजरिए से परखा जाता है. व्हील कवर अगर तेज रफ्तार में निकल जाए तो वह सड़क पर मौजूद दूसरे वाहनों या सुरक्षा घेरा बना रही गाड़ियों के लिए भी जोखिम बन सकता है. इसी वजह से इन्हें जानबूझकर इस्तेमाल नहीं किया जाता.

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मेंटेनेंस और सफाई की सहूलियत- VVIP वाहन लगातार दौरे और मूवमेंट में रहते हैं. ऐसे में रोजाना व्हील कवर खोलकर उनकी सफाई या मरम्मत करना व्यवहारिक नहीं होता. धूल, कीचड़ और छोटे पत्थर व्हील कवर के अंदर फंस सकते हैं, जिससे रखरखाव में दिक्कत बढ़ जाती है.

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शोर से बचाव भी एक कारण- खराब या ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर व्हील कवर से आवाज आने लगती है. VVIP वाहनों में किसी भी तरह का अनावश्यक शोर या कंपन स्वीकार्य नहीं होता. शांत और स्मूद सफर सुनिश्चित करने के लिए ऐसे हिस्सों से दूरी रखी जाती है.

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हर वाहन के हिसाब से अलग फैसला- प्रधानमंत्री मोदी के Fortuner काफिले में आमतौर पर व्हील कवर नहीं लगाए जाते. हालांकि, जब ज्यादा महंगी और हाई-एंड गाड़ियों जैसे Range Rover का इस्तेमाल होता है, तो उनमें खास तरह के एलॉय व्हील्स होते हैं, जिनमें कवर पहले से डिजाइन का हिस्सा होते हैं. इन सभी बातों का फैसला VVIP सुरक्षा से जुड़े अधिकारी हर दौरे से पहले बारीकी से करते हैं.