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आपने मैराथन की रेस के बारे में जरूर सुना होगा, जिसमें पार्टिसिपेंट्स लंबे डिस्टेंस को कवर करते हुए दौड़ लगते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं इस रेस की शुरुआत कैसे हुआ हुई और इसका ट्रैक 42.195 किलोमीटर तक ही क्यों होता है? आइए जानते हैं.

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आपने टीवी, सोशल मीडिया आदि में लोगों को मैराथन की रेस में दौड़ते हुए देखा होगा, जिसमें कई लोग बीच में ही हार मान जाते है और कुछ ही लोग फिनिशिंग पॉइंट तक पहुंच पाते हैं.

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इस रेस की कहानी बड़ी मशहूर है, बताया जाता है कि 490 ईसवी में पहली बार इस मैराथन रेस की शुरुआत हुई थी. कहा जाता है कि यूनानी और पर्शियन सैनिकों के बीच एक युद्ध हुआ था, जिसमें यूनान की छोटी सी सेना ने पर्शियन्स को बुरी तरह से हरा दिया था. इस जीत की खुशखबरी देने के लिए यूनानी सेना के फिडिपीडेस नाम के सैनिक को यूनान भेजा गया.

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आमतौर पर सैनिक घोड़े की मदद से एक जगह से दूसरी जगह संदेश पहुंचाते थे. लेकिन फिडिपीडेस ने मैराथन से एथेंस तक का कुल डिस्टेंस 40 किमी दौड़कर ही कवर किया और संदेश पहुंचाया. कहा जाता है कि जैसे ही वह पहुंचा उसने सिर्फ एक शब्द बोला नैनीकिकामैन जिसका ग्रीक में मतलब था हम जीत गए.

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खून से लतपत फिडिपीडेस ने जैसे ही यह शब्द बोला, उसके तुरंत बाद उसकी मौत हो गई. वक्त के साथ उसकी कहानी मशहूर हो गई और यही कहानी मॉडर्न मैराथन की इंस्पिरेशन बनी.

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साल 1896 में जब मॉडर्न ओलिंपिक की शुरुआत की गई तो एक फ्रेंच स्कॉलर मिचेल ब्रिएल ने एक आइडिया दिया कि ओलंपिक में इस तरह की एक रेस होनी चाहिए, जो इस कहानी को ट्रिब्यूट दे.

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उस समय मैराथन की कहानी से प्रेरित होकर इस रेस का कुल डिस्टेंस 40 किमी रखा गया. लेकिन इसके बाद भी ये डिस्टेंस तय नहीं हो पा रहा था. कभी इसे 38 तो कभी कुछ और कर दिया जाता था. ये ट्रैक इस बात पर निर्भर करता था कि अलग-अलग जगहों पर रस्तें और जगह कैसी हैं.

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फिर होती है रॉयल फैमली की एंट्री जहां से इस रेस का डिस्टेंस फिक्सड हुआ. साल 1908 में जब लंदन में ओलंपिक हुए, तब इस रेस को रॉयल फैमिली के लिए स्पेशल बनाने के लिए तय हुआ कि रेस की शुरुआत विंडसर कास्टल से होगी और खत्म वाइट सिटी स्टेडियम में होगी. इस डिस्टेंस को 40 से 42.195 किमी कर दिया गया ताकि इस रेस की फिनिश लाइन एकदम रॉयल फैमिली के सामने आकर खत्म हो. यहीं से इस रेस का डिस्टेंस फिक्स हो गया.