पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा नाम बन चुके सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर चर्चा में हैं. उनकी संपत्ति, राजनीतिक सफर, परिवार और क्रिमिनल मामलों को लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी है. जानिए आखिर कितने अमीर हैं बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और कैसे उन्होंने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई.
सुवेंदु अधिकारी के परिवार में कौन-कौन?

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सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक राजनीति में एक्टिव रहे और TMC सांसद भी रह चुके हैं. उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी भी राजनीति से जुड़े रहे हैं. अधिकारी परिवार का पूर्वी मिदनापुर जिले में काफी प्रभाव माना जाता है. यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में इस परिवार को मजबूत राजनीतिक घराने के तौर पर देखा जाता है.
क्यों नहीं की शादी?

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सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की ही तरह शादी नहीं की. इसकी वजह सुवेंदु अधिकारी ने खुद बताई कि आखिर उन्होंने ये फैसला क्यों लिया. अधिकारी ने बताया कि 1987 में उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा और उस वक्त उनके इलाके के तीन बड़े स्वतंत्रा सेनानी- सतीश सामंत, सुशील धारा और अजय मुखर्जी ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इन तीनों ने बिना शादी किए ही देश की सेवा की, जिनसे उन्हें भी प्रेरणा मिली. तभी सुवेंदु अधिकारी ने ठान ली कि वो पूरी जिंदगी शादी नहीं करेंगे और जनता की सेवा करेंगे.
कितनी है सुवेंदु अधिकारी की नेटवर्थ?

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चुनावी हलफनामों के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी के पास करीब 12 हजार रुपये कैश है . उनके पास बैंक डिपॉजिट, जमीन, निवेश और बाकी चल-अचल संपत्तियां मौजूद हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 85.87 लाख रुपये है. कहा जाता है उनके ऊपर एक रुपये का भी कर्जा नहीं है.
कैसी रही पढ़ाई-लिखाई?

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सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल से ही अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने कॉलेज की शिक्षा हासिल की और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे. राजनीतिक माहौल वाले परिवार से आने की वजह से उनका झुकाव शुरुआत से ही राजनीति की तरफ रहा. कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने संगठन और जनसंपर्क की राजनीति को करीब से समझना शुरू कर दिया था.
क्रिमिनल रिकॉर्ड को लेकर क्यों चर्चा?

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सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कई मामलों का जिक्र चुनावी हलफनामों और राजनीतिक आरोपों में किया जाता रहा है. सुवेंदु अधिकारी के ऊपर 29 केस दर्ज हैं. इनमें राजनीतिक प्रदर्शन, हिंसा और बाकी विवादों से जुड़े मामले शामिल बताए जाते हैं. हालांकि सुवेंदु अधिकारी और बीजेपी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही है. बंगाल की राजनीति में बड़े नेताओं पर कानूनी मामलों का सामना करना आम बात मानी जाती है.
कैसे शुरू हुआ सियासी सफर?

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सुवेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र राजनीति और स्थानीय संगठन से की थी. बाद में वे तृणमूल कांग्रेस से जुड़े और तेजी से पार्टी के बड़े नेता बन गए. नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें पूरे बंगाल में पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने कई चुनाव जीते और राज्य सरकार में मंत्री भी बने. सुवेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के बेहद भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. लेकिन राजनीतिक मतभेदों के बाद उन्होंने 17 दिसंबर 2020 को टीएमसी छोड़ दी और 20 दिसंबर 2020 को बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी में आने के बाद सुवेंदु बंगाल में पार्टी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे. 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई और 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर एक बार फिर जीत हासिल की और भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को पटखनी दी.
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