
1 / 9
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध का असर अब पेट्रेल-डीजल, एलपीजी के बाद कंडोम पर भी दिखने लगा है. अनचाहे गर्भ और संक्रमण को रोकने वाला कंडोम अब खुद खतरे में पड़ गया है. मिडिल ईस्ट में संघर्ष की वजह से कंडोम के रॉ-मटेरिल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. जिसका सीधा असर भारत के परिवार नियोजन उत्पादों पर पड़ रहा है.
बढ़ सकती हैं कंडोम की कीमतें

2 / 9
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से कंडोम निर्माण के प्रमुख कच्चे माल महंगे हो गए हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्पादन लागत में 40-50 प्रतिशत की वृद्धि से बाजार में कीमतें उछाल मार सकती हैं, इसके अलावा कई ब्रांड्स के बाजार से गायब तक का संकट पैदा हो गया है.
कच्चे माली की कमी से जूझ रही कंपनियां

3 / 9
भारतीय कंपनियां जैसे एचएलएल लाइफकेयर और मैनकाइंड फार्मा कच्चे माल की कमी से जूझ रही हैं. अमोनिया एवं सिलिकॉन ऑयल जैसे आयातित सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं. यदि स्थिति यथावत रही, तो गरीब एवं मध्यम वर्ग पर गर्भनिरोधक उपयोग घट सकता है, जिससे अनचाहे गर्भधारण एवं यौन संक्रमणों में इजाफा होगा.
अमोनिया की भारी कमी

4 / 9
कंडोम निर्माण में लेटेक्स को स्थिर रखने हेतु अमोनिया अनिवार्य है. भारत अपनी 86 प्रतिशत आवश्यकता सऊदी अरब, कतर एवं ओमान से आयात करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से जहाज रुक गए, जिससे आपूर्ति ठप एवं कीमतें 50 प्रतिशत बढ़ीं.
नेचुरल लेटेक्स आधार प्रभावित

5 / 9
रबड़ के पेड़ों से प्राप्त लेटेक्स कंडोम का मूल तत्व है. वैश्विक शिपिंग बाधाओं से परिवहन महंगा हुआ. अमोनिया अभाव में लेटेक्स प्रोसेसिंग कठिनाई से चल रही है. उत्पादन धीमा पड़ गया.
सिलिकॉन ऑयल महंगा

6 / 9
चिकनाई प्रदान करने वाला सिलिकॉन ऑयल मुख्यतः चीन से आता है. युद्धजनित लॉजिस्टिक्स संकट से इसकी उपलब्धता घटी. कीमतों में भारी उछाल आया, जो निर्माण लागत को बढ़ा रहा है. कंपनियां वैकल्पिक स्रोत तलाश रही हैं.
सल्फर और जिंक ऑक्साइड

7 / 9
कंडोम को मजबूती देने वाले ये रसायन भी प्रभावित हुए. गल्फ आयात रुकने से स्टॉक समाप्ति की स्थिति. वैश्विक बाजार में अस्थिरता से कीमतें चढ़ गईं. गुणवत्ता प्रभावित होने का डर.
पैकेजिंग सामग्री संकट

8 / 9
एल्यूमिनियम एवं पीवीसी फॉयल की कीमतें अस्थिर हो गईं. शिपिंग लागत 150 प्रतिशत बढ़ी. छोटे पैकेटिंग यूनिट्स पर दबाव. उत्पादन में देरी बढ़ रही है.
फ्लेवर और कलर पर भी असर

9 / 9
ग्लोबल लॉजिस्टिक्स बाधाओं से स्वाद एवं रंग सामग्रियों की सप्लाई रुकी. विविधता घटने से उपभोक्ता पसंद प्रभावित. कंपनियां उत्पाद सीमित कर रही हैं.