कौन हैं अब्दुल्ला आजम खान? 2 पासपोर्ट केस में 7 साल की सजा रद्द, फिर भी जेल में गुजारने होंगे दिन

Who is Abdullah Azam Khan: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को रामपुर की सेशन कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने दो पासपोर्ट मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई 7 साल की जेल की सजा को रद्द कर दिया है. जानिए क्या था यह पूरा विवाद और क्यों अभी भी जेल में ही रहेंगे पूर्व विधायक.

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Who is Abdullah Azam Khan: उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान के परिवार के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. एमपी-एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट ने पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को दो पासपोर्ट रखने के मामले में बड़ी राहत दी है. अदालत ने उनकी अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) द्वारा सुनाई गई 7 साल की जेल की सजा और 50 हजार रुपये के जुर्माने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है.

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कौन हैं अब्दुल्ला आजम खान?

कौन हैं अब्दुल्ला आजम खान?2 / 5

अब्दुल्ला आजम खान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान के छोटे बेटे हैं. उन्होंने साल 2017 में रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. हालांकि, कम उम्र में चुनाव लड़ने और फर्जी दस्तावेजों के आरोपों के चलते उनकी विधायकी भी जा चुकी है.

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क्या है दो पासपोर्ट का पूरा मामला?

क्या है दो पासपोर्ट का पूरा मामला?3 / 5

अब्दुल्ला आजम के खिलाफ यह मामला साल 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज किया गया था. यह एफआईआर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना ने दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर अलग-अलग जन्मतिथियों के साथ दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए. आरोपों के मुताबिक, उनके एक पासपोर्ट में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे पासपोर्ट में 30 सितंबर 1990 लिखी हुई थी. भाजपा विधायक का दावा था कि अब्दुल्ला आजम ने इन दोनों पासपोर्ट का इस्तेमाल विदेशों की यात्रा करने और व्यापारिक व सरकारी कामों में अनुचित लाभ उठाने के लिए किया था.

निचली अदालत ने दी थी 7 साल की सजा

निचली अदालत ने दी थी 7 साल की सजा4 / 5

इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद, 5 दिसंबर 2025 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं (IPC 420, 467, 468, 471) के तहत दोषी पाया था. कोर्ट ने उन्हें अधिकतम 7 साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई थी. इस फैसले के खिलाफ अब्दुल्ला के वकीलों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब सेशन कोर्ट ने सजा को खारिज कर दिया है.

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राहत के बाद भी जेल में ही क्यों रहेंगे अब्दुल्ला?

राहत के बाद भी जेल में ही क्यों रहेंगे अब्दुल्ला?5 / 5

दो पासपोर्ट केस में भले ही अब्दुल्ला आजम की 7 साल की सजा रद्द हो गई हो, लेकिन वह अभी तुरंत जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे. दरअसल, वह अपने पिता आजम खान के साथ 'दो पैन कार्ड' से जुड़े एक अन्य जालसाजी के मामले में भी रामपुर जेल में बंद हैं, जिसमें उन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है. यही वजह है कि पासपोर्ट केस में क्लीन चिट मिलने के बावजूद उन्हें अभी सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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