IPL 2026 Final: होम ग्राउंड के बावजूद हार सकती है GT, 'शुभमन की आर्मी' को नहीं मिलेगा ये फायदा
Virender Sehwag On GT's Home Advantage in IPL 2026 Final: गुजरात टाइटंस अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईपीएल 2026 के फाइनल में आरसीबी का सामना करने की तैयारी कर रही है. इस पर भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग का मानना है कि सिर्फ स्टेडियम होने से जीटी को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा. अपने घरेलू मैदान पर खेलने के बावजूद, सहवाग को लगता है कि खिताबी मुकाबला अभी भी बराबरी का है.

फाइनल से पहले 'क्रिकबज' पर एक चर्चा के दौरान, सहवाग ने इस मुकाबले को '50-50' की लड़ाई बताया. उन्होंने पूरे सीजन में आरसीबी के प्रदर्शन की तारीफ की और कहा कि उनकी कंसिस्टेंसी और कॉन्फिडेंस उन्हें चैंपियनशिप के लिए बराबर का मजबूत दावेदार बनाते हैं.
2 / 6आमतौर पर घरेलू मैदान होने से हालात, पिच के मिजाज और दर्शकों के समर्थन से जान-पहचान होती है. गुजरात टाइटंस ने पूरे सीजन में इन फायदों का लुत्फ उठाया है. हालांकि, वीरेंद्र सहवाग ने बताया कि फाइनल मैच, लीग के आम मैचों के मुकाबले अलग हालात में खेला जाता है.
3 / 6सहवाग के मुताबिक, घरेलू टीम यह उम्मीद नहीं कर सकती कि पिच पूरी तरह से उसकी ताक़त के हिसाब से तैयार की जाएगी. चूंकि चैंपियनशिप मैच टूर्नामेंट के अधिकारियों की देखरेख में होता है, इसलिए पिच तैयार करने का प्रॉसेस आम घरेलू मैचों की तुलना में ज्यादा न्यूट्रल होता है.
4 / 6सहवाग का मानना है कि इससे दोनों टीमों को खेलने का बराबर का मौका मिलता है. हालांकि GT को अभी भी दर्शकों का सपोर्ट और लोकल लोगों का साथ मिलेगा, लेकिन उन्हें लगता है कि अपनी मर्जी की पिच न होने से, घरेलू मैदान पर खेलने से मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा कम हो जाता है.
5 / 6RCB, क्वालिफायर 1 में जीटी पर शानदार जीत हासिल करने के बाद, पूरे जोश के साथ फाइनल में उतर रही है. रजत पाटीदार की टीम ने गुजरात टाइटंस को खेल के हर डिपार्टमेंट में पछाड़ दिया, और जब गुजरात के शुरुआती विकेट गिरे, तो उनकी बल्लेबाजी की कमजोरियां सामने आ गईं. उनकी बैलेंस्ड टीम और बल्लेबाजी की मजबूत गहराई ने उन्हें इस सीजन की सबसे खतरनाक टीमों में से एक बना दिया है.
6 / 6दूसरी तरफ, गुजरात ने क्वालिफायर 2 में शुभमन गिल और साई सुदर्शन के शानदार प्रदर्शन की बदौलत जबरदस्त वापसी की. सहवाग का मानना है कि अगर GT को RCB को हराना है, तो उसे यही रणनीति फिर से अपनानी होगी. आखिरकार, उन्हें लगता है कि फाइनल का फैसला घरेलू मैदान के फायदे से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि कौन सी टीम सबसे बड़े मंच पर परिस्थितियों के हिसाब से कितनी जल्दी ढलती है और दबाव को बेहतर तरीके से संभालती है.


















