विनेश सेमीफाइनल मुकाबले में मीनाक्षी गोयत से कड़े मुकाबले में हार गईं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस नतीजे से उनके कमबैक को डिफाइन नहीं किया जा सकता. पूर्व वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल विनर के मुताबिक, खेल से महीनों दूर रहने के बाद मैट पर वापसी करने और मुश्किल हालात का सामना करने की उनकी क्षमता ही वो जीत है जिस पर उन्हें गर्व है.

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मुकाबले के बाद, विनेश ने कुश्ती प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अपने करियर को फिर से शुरू करने की कोशिश के दौरान उन्हें बार-बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि कानूनी मदद मिलने के बावजूद, जिससे उन्हें भाग लेने की अनुमति मिली थी, उनके रास्ते में कई चुनौतियां खड़ी की गईं, जिससे उनकी वापसी जरूरत से ज्यादा मुश्किल हो गई.

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31 साल की पहलवान ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे को जन्म देने के सिर्फ 10 महीने बाद फिर से मुकाबला करना उनके जीवन के सबसे गर्व भरे पलों में से एक था. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका ये सफर बाकी महिला एथलीटों, खास तौर से माँओं को, मौके खोने के डर के बिना अपनी खेल खेल से जुड़ी ख्वाहिशों को पूरा करते रहने के लिए इंस्पायर करेगा.

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विनेश ने ऐसी नीतिगत सुधारों की भी मांग की जो मां बनने के बाद वापसी करने वाली महिला पहलवानों का समर्थन करें. उनका मानना है कि ऐसे हालात में एथलीट्स को निष्पक्ष मौके और उचित फ्लेक्सिबिलिटी मिलनी चाहिए, ताकि वो आसानी से वापस टॉप लेवल के कॉम्पिटीशन में शामिल हो सकें.

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पहलवान ने आगे आरोप लगाया कि उनके वजन वर्ग को लेकर हुई उलझन और कार्यक्रम से जुड़ी समस्याओं ने ट्रायल्स के दिन उनकी तैयारियों पर असर डाला. उन्हें लगा कि इन हालात ने एक अहम कॉम्पिटीशन से पहले उन पर बेवजह दबाव डाल दिया.

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अपनी चिंताओं के बावजूद, विनेश ने हार की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए माना कि मैच अभ्यास की कमी और कॉम्पेटीटिव माहौल से दूर रहने का भी इस नतीजे में कुछ हाथ था. अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखते हुए, उन्होंने कहा कि वह खुद में सुधार करने के लिए मोटिवेटेड हैं और इस बात को कंफर्म किया कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स के लिए क्वालिफाई करना ही उनका अंतिम लक्ष्य बना हुआ है.