Mahabharata Story: महाभारत काल के इस युद्ध में पांडव पक्ष से पांचों भाई युद्ध भूमी में थे. इनका मार्गदर्शन श्रीकृष्ण सारथी बनकर कर रहे थे. दूसरी ओर कौरव 100 भाई थे जिनका नेतृत्व दुर्योधन और दुशासन कर रहे थे.
इन योद्धाओं ने नहीं लिया था युद्ध में हिस्सा

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महाभारत के युद्ध में कई महान योद्धाओं ने हिस्सा लिया था. कौरवों और पांडवों ने अपने सभी शुभचिंतकों को न्योता दिया और समर्थन मांगा था. हालांकि, 4 लोग ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था.
विदुर

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महात्मा विदुर युद्ध में शामिल नहीं हुए थे. वह तटस्थ रहकर केवल युद्ध के गवाह बने थे. कौरवों द्वारा अपमानित होने के कारण विदुर ने युद्ध से दूरी बना ली थी. विदुर धर्मराज के अवतार थे और सत्य का साथ देते थे. उन्होंने पता था कि, कौरव अधर्म के मार्ग पर चल रहे हैं इस कारण भी युद्ध से दूर रहे.
बलराम

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भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम युद्ध में शामिल नहीं हुए थे. मान्यताओं के अनुसार, वह पांडवों के मामा थे और कौरवों में से दुर्योधन के गुरु थे. दुर्योधन उनका शिष्य था इस वजह से वह दोनों के हितैषी थे और युद्ध में शामिल नहीं हुए.
उडुपी के राजा

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उडुपी जो आज के समय में कर्नाटक है वहां के राजा युद्ध में शामिल नहीं हुए थे. भगवान श्रीकृष्ण ने उडुपी के राजा से सेना के लिए भोजन की व्यवस्था करने का आग्रह किया था. उन्होंने इसे स्वीकार किया और इस प्रकार युद्ध में भाग नहीं लिया.
रुक्मी

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श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी के भाई रुक्मी एक शक्तिशाली योद्धा थे. वह पांडवों का साथ देना चाहते थे. रुक्मी पांडवों के पास गए और पराक्रम का घमंड करने लगे. घमंडी स्वभाव के कारण रुक्मी का प्रस्ताव अर्जुन ने ठुकरा दिया था. (All Photo Credit- AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.