Hindu Dharma: मरने के बाद इंसान अपने परिवार की आवाज सुन पाता है या नहीं सुन पाता है इसको लेकर धार्मिक और वैज्ञानिक तौर पर अलग मत हैं. धर्म और विज्ञान इस विषय के बारे में क्या कहता है चलिए इसके पीछे का सच जानें.
मृत्यु के बाद नष्ट हो जाता है शरीर

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किसी की मृत्यु के बाद उसका शरीर पूरी तरह से नष्ट हो जाता है. शरीर के साथ ही मस्तिष्क मृत्यु हो चुकी होती है. जबकि, सुनने और समझने के लिए मस्तिष्क का सक्रिय होना जरूरी है. ऐसे में सुनना असंभव माना जाता है.
क्या कहता है विज्ञान?

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विज्ञान मानता है कि, व्यक्ति की मौत के बाद सुनने की क्षमता खत्म हो जाती है. मृत्यु के बाद शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है. ऐसे में कोई भी अंग काम नहीं करता है.
नहीं सुन सकता है मुर्दा

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अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए, तो मृत्यु के बाद शव सुन नहीं सकता है. मौत के बाद सुनने, सोचने और समझने की क्षमता खत्म हो जाती है. विज्ञान मानता है कि, मृत्यु के बाद मुर्दा घरवालों की आवाज नहीं सुन सकता है.
आध्यात्मिक मान्यता

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मृत्यु को लेकर आध्यात्मिक मान्यता बिल्कुल अलग है. इसके अनुसार, मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा परिजनों के आसपास वातावरण से जुड़ी रहती है. ऐसे में आत्मा परिवार की आवाजें सुन सकती है. हालांकि, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है.
गरुड़ पुराण की मान्यता

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गरुड़ पुराण में मृत्यु और इसके बाद आत्मा की यात्रा के बारे में बताया गया है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, मृत्यु होने पर आत्मा शरीर से निकल जाती है. इसके बाद आत्मा कुछ समय तक परिवार के बीच रहती है. आत्मा आवाजें सुन सकती है और परिवार के दुख को महसूस कर सकती है. यह सिर्फ धार्मिक मान्यता है. (All Photo Credit- Social Media And AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.