Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला विराजमान हुए थे. मंदिर निर्माण की इंजीनियरिंग बेहद ही खास है. राम मंदिर भारतीय संस्कृति और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनोखा संगम है. आइये मंदिर से जुड़े रहस्यों के बारे में जानते हैं.
मंदिर 2000 साल टिकने का दावा

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राम मंदिर की नींव बेहद खास और मजबूत है. मंदिर निर्माण से पहले इंजीनियरिंग तकनीकों से नींव को मजबूत किया गया, इसके बाद बहुस्तरीय आधार पर नींव को तैयार कर मंदिर बनाया गया है.
बिना लोहे के बना है राम मंदिर

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राम मंदिर में बिल्कुल भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है. लोहे में जंग लगने के साथ ही इसके कमजोर होने का खतरा रहता है. मंदिर में तांबे और पत्थरों को पारंपरिक जोड़ने की तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है. यह मंदिर हजारों साल तक मजबूती से खड़ा रह सकता है.
सूर्य की किरणें करती हैं रामलला का तिलक

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राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक सबसे चर्चित और वैज्ञानिक चमत्कार है. सूर्य तिलक के दौरान दोपहर में सूर्य की किरणें विशेष दर्पणों और लेंसों से होकर रामलला के मस्तक पर पहुंचती हैं. रामनवमी के अवसर पर सूर्य तिलक किया गया था.
मंदिर का वास्तु है खास

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वास्तुशास्त्र की दृष्टि से देखा जाए तो मंदिर बहुत ही खास है. राम मंदिर आधुनिक विज्ञान और संस्कृति का खास संगम है. मंदिर में मंडप, गलियारे और खुले हिस्से में हवा का प्रवाह बना रहता है. मंदिर में हर जगह पर वेंटिलेशन है.
ज्यामितीय सिद्धांतों पर आधारित है मंदिर

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राम मंदिर की ऊंचाई, अनुपात और डिजाइन बेहद खास है. यह दिखने में सुंदर है. इसके साथ ही यह विशेष ज्यामितीय सिद्धांतों पर आधारित है. मंदिर के मंडप और स्तंभ सभी बेहद खास हैं. यह ध्वनि विज्ञान का अनूठा उदाहरण है. मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज पूरे मंदिर में गूंजती है.
बेहद खास है राम मंदिर

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इन सभी कारणों से राम मंदिर बेहद खास है. इसकी निर्माण तकनीक में कई रहस्य हैं जो मंदिर को खास और अलग बनाते हैं. (All Photo Credit- AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यता और सामान्य जानकारी पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.