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अगर आपकी निंद पूरी ना हो और पढ़ाई करने का तरीका भी अगर सही ना हो तो भी दिमाग जल्दी थकने लगता है. इसलिए इसे कमजोरी समझने के बजाय इसके पीछे छिपे कारणों को समझना ज्यादा जरूरी है, ताकि सही आदतें अपनाकर इस समस्या को आसानी से कम किया जा सके.
आखों की थकान देती है नींद का संकेत

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जब हम लंबे समय तक किताब या फिर स्क्रीन पर नजर टिकाए रहते हैं तो आंखों की मांसपेशिया थकने लगती हैं. लगातार फोकस करने से आंखों पर दबाव बढ़ता है और फिर दिमाग आराम का सिग्नल भेजता है. यही कारण है कि पढ़ाई के दौरान आंखें भारी होने लगती हैं और जम्हाई आने लगती है.
मुश्किल विषय बढ़ाता है सुस्ती

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अगर पढ़ाई का विषय कठिन हो या समझ में न आ रहा हो तो दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. कई बार दिमाग इस दबाव से बचने के लिए खुद को शटडाउन मोड में डाल देता है जो नींद के रूप में नजर आता है.
दिमाग की ज्यादा मेहनत बनती है वजह

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पढ़ाई कोई आसान काम तो है नहीं. इसमें दिमाग को नई जानकारी समझना, उसे प्रोसेस करना और याद रखना पड़ता है. जब यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है तो दिमाग थक जाता है. ऐसे में शरीर खुद को रिलैक्स करने के लिए नींद की ओर झुकने लगता है.
कम नींद का असर पढ़ाई पर

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जो लोग 7-8 घंटे की पूरी नींद नहीं लेते हैं उनके शरीर में थकान जमा होती रहती है. जैसे ही वे शांत माहौल में बैठते हैं, शरीर उसे आराम का मौका समझकर तुरंत नींद की ओर चला जाता है. परीक्षा के समय यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है.
खाना खाने के बाद क्यों आती है नींद?

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खाना खाने के बाद शरीर का फोकस पाचन प्रक्रिया पर चला जाता है. इस दौरान खून का प्रवाह पेट की ओर बढ़ता है और दिमाग थोड़ा धीमा हो जाता है. इसलिए भोजन के तुरंत बाद पढ़ाई करने से नींद जल्दी आती है.
दिलचस्पी की कमी बढ़ाती है ऊब

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जब पढ़ाई में मन नहीं लगता, तो दिमाग खुद ही ध्यान भटकाने लगता है. यह ऊब धीरे-धीरे सुस्ती में बदलती है और फिर नींद आने लगती है.
गलत माहौल भी है कारण

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अगर आप बिस्तर पर लेटकर तकिया लगाकर या कम रोशनी में पढ़ते हैं तो शरीर उस माहौल को आराम और नींद से जोड़ लेता है. जिसके बाद पढ़ाई शुरू करते ही नींद हम पर हावी होने लगती है. सही पोश्चर, टेबल-चेयर और अच्छी रोशनी पढ़ाई करने के लिए बेहद जरूरी है.