राजस्थान की वो इमारत, जहां कोई AC-कूलर नहीं; फिर भी मई-जून के महीने में नहीं लगती गर्मी

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में स्थित हवामहल सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि इंडियन आर्किटेक्ट और सांइटिफिक सोच का भी एक अद्भुत नमूना है. आज भी हवामहल दुनिया बर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. हवामहल में बने सुंदर झरोखे, शानदार डिजाइन और इसकी अनोखी बनावट की सुंदरता दूर से ही लोगों को खींचती है. कहते हैं कि राजस्थान जैसी भीषण गर्मी वाली जगह में भी हवामहल के अंदर प्राकृतिक रूप से ठंडक बनी रहती है. जहां बाहर तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जाता है, लेकिन हवामहल के अंदर सुकून भरी हवा महसूस होती है.

hawa mahal jaipur
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किसने और कब बनवाया था हवामहल

किसने और कब बनवाया था हवामहल2 / 7

हवामहल का निर्माण 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था. इसे आर्किटेक्ट लालचंद उस्ताद ने डिजाइन किया था. इस इमारत को खासतौर पर राजघराने की महिलाओं के लिए बनाया गया था, ताकि वे बाहर के त्योहारों और बाजारों को देख सकें, लेकिन बाहर से उन्हें कोई न देख पाए. हवामहल में कुल 953 छोटी-छोटी खिड़कियां हैं, जिन्हें 'झरोखे' कहा जाता है. यही झरोखे इस इमारत को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं.

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इमारत की खासियत हैं 953 झरोखे

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वैज्ञानिक रूप से देखें तो हवामहल में वेंचुरी इफेक्ट नाम का प्रिंसिपल काम करता है. इस प्रिंसिपल के अनुसार जब हवा किसी छोटी जगह से तेजी से गुजरती है, तो उसका दबाव कम हो जाता है और हवा ठंडी महसूस होने लगती है. हवामहल की सैकड़ों छोटी खिड़कियां हवा को तेज गति में अंदर आने देती हैं. इससे पूरी इमारत में लगातार वेंटिलेशन बना रहता है और अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी हो जाता है.

इमारत की डिजाइन भी करती है गर्मी को कम

इमारत की डिजाइन भी करती है गर्मी को कम4 / 7

इमारत की डिजाइन भी गर्मी कम करने में मदद करती है. हवामहल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है. यह पत्थर दिन में गर्मी को धीरे-धीरे एब्जॉर्ब करता है और जल्दी गर्म नहीं होता है. इसके अलावा मोटी दीवारें भी अंदर के टेंपरेचर को बैलेंस करने में मदद करती हैं. मोटी दीवारें बाहर की तेज गर्मी को सीधे अंदर नहीं आने देती है.

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वेंचुरी इफेक्ट से मिलती है प्राकृतिक ठंडक

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हवा महल की ऊंचाई और स्ट्रक्चर भी काफी खास है. यह पांच मंजिला इमारत पिरामिड जैसी आकृति में बनाई गई है. ऊपरी हिस्से में ज्यादा खिड़कियां होने की वजह से गर्म हवा ऊपर की तरफ निकल जाती है और नीचे ठंडी हवा बनी रहती है.

हवामहल में गलियारे और कमरे हैं संकरे

हवामहल में गलियारे और कमरे हैं संकरे6 / 7

हवामहल की एक और खास बात ये है कि हवामहल के अंदर गलियारे और कमरे बहुत संकरे बनाए गए हैं. इससे हवा का प्रवाह तेज हो जाता है और ठंडक ज्यादा महसूस होती है. एडवांस बिल्डिंग में जहां एयर कंडीशनर की जरूरत पड़ती है, वहीं हवामहल की पारंपरिक डिजाइन खुद ही प्राकृतिक एसी का काम करती है.

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सूर्य की दिशा को ध्यान में रखकर बना है हवामहल

सूर्य की दिशा को ध्यान में रखकर बना है हवामहल7 / 7

हवामहल को बनाते समय आर्किटेक्ट ने सूर्य की दिशा का भी पूरा ध्यान रखा था और फिर इस इमारत को बनाया था. हवामहल के अंदर सुबह और शाम के समय सूरज की रोशनी सीधे न आए, इसके लिए झरोखे और दीवारों का कोण खास तरीके से तय किया गया था. इससे अंदर ज्यादा गर्मी नहीं होती है. आज भी इंजीनियर और आर्किटेक्ट हवामहल की डिजाइन को ट्रेडिशनल इंडियन आर्किटेक्ट का शानदार उदाहरण मानते हैं. यह इमारत बताती है कि पुराने समय में बिना बिजली और मशीनों के भी लोग विज्ञान और प्रकृति की मदद से गर्मी से बचने के तरीके जानते थे.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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