Census 2027: जनगणना के दौरान आपका पर्सनल डाटा कितना सेफ? मिल गया जवाब

Census 2027 important update: भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो गया है, जब जनगणना की जानकारी के लिए लोग आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो वे आपके परिवार और घर से जुड़े 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे. इस दौरान सवाल उठना लाजिमी है आपका जो डेटा लिया जाएगा आखिर कितना सुरक्षित है.

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Census 2027 important update: भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो गया है, जब जनगणना की जानकारी के लिए लोग आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो वे आपके परिवार और घर से जुड़े 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे. इस दौरान सवाल उठना लाजिमी है आपका जो डेटा लिया जाएगा आखिर कितना सुरक्षित है.

Census 2027 important update:भारत में जनगणना 2027 के पहले चरण का आगाज 01 अप्रैल 2026 से हो चुका है. जोकि 30 सितंबर तक जारी रहेगा। इसमें सवालों के जरिए घर और परिवार का ब्योरा जुटाया जाएगा। ऐसे में हर नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है उनकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है? क्या यह डेटा किसी के हाथ लग सकता है? भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने इन सभी चिंताओं पर विराम लगाते हुए डेटा की सुरक्षा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. आपसे ली गई हर जानकारी कानूनी रूप से पूरी तरह गोपनीय होती है.

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गोपनीय है आपकी दी हुई जानकारी

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जनगणना अधिनियम की धारा 15 नागरिकों के डेटा को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करती है. इस कानून के तहत व्यक्तिगत जानकारी को किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. सरकार के अन्य विभाग या निजी संस्थाएं भी इस डेटा तक पहुंच नहीं बना सकतीं. इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल देश की सांख्यिकीय स्थिति को समझना है, न कि किसी व्यक्ति की निगरानी करना या उसकी निजी जानकारी का उपयोग करना.

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RTI और अदालती कार्यवाही से बाहर

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लोगों में अक्सर यह चिंता रहती है कि कहीं उनकी निजी जानकारी आरटीआई के जरिए सार्वजनिक न हो जाए लेकिन नियमों के अनुसार, जनगणना का व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह आरटीआई के दायरे से बाहर है. इतना ही नहीं, इसे किसी भी अदालत में साक्ष्य के रूप में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. यानी यह डेटा किसी कानूनी विवाद, सरकारी योजना या व्यक्तिगत दावे की पुष्टि के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता.

डिजिटल और डेटा सेंटर की सुरक्षा

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इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और सटीकता दोनों बढ़ेंगी. डेटा एकत्र करने के लिए मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिससे कागजी त्रुटियां कम होंगी. सरकार ने डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया है, जिससे सुरक्षा राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक संपत्तियों की तरह सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की सेंधमारी को रोका जा सकेगा.

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सिर्फ डेटा कलेक्शन के लिए जानकारी

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जनगणना आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि एकत्र की गई जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय डेटा तैयार करने के लिए किया जाएगा. इससे देश की जनसंख्या, साक्षरता दर, रोजगार, और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जाता है. इस डेटा के आधार पर सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन इसमें किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की जाती. यह पूरी प्रक्रिया सामूहिक विकास और योजना निर्माण के लिए होती है.

जनगणना का SIR या NPR से संबंध नहीं

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जनगणना को लेकर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जोड़कर भी कई भ्रम फैलते हैं. आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल NPR को अपडेट करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. साथ ही, जनगणना और SIR दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, जिनका उद्देश्य भी भिन्न है. इसलिए नागरिकों को इन दोनों को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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