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Nadiya Ke Paar Movie: होली आने वाली है. कई जगहों पर गुलाल वाली होली खेली जाती है, तो कहीं पर ठेठ होली खेलने का चलन है. इस 43 साल पुरानी फिल्म में उत्तर प्रदेश की ठेठ होली दिखाई गई है. यह फिल्म राजश्री प्रोडक्शन की है.

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जल्द ही होली का त्योहार आने वाला है. देश में कई तरीकों से होली खेली जाती है. कुछ जगहों पर गुलाल तो कुछ जगहों पर फूलों की होली खेली जाती है. मगर उत्तर प्रदेश में होली को फाग कहा जाता है. यहां पर लोग होली को फाग बोलते हैं.

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इस फाग को खेलने और रस्में काफी अलग होती है. इस ठेठ होली खेलने के तरीके को इस 43 साल पुराने ब्लॉकबस्टर फिल्म में दिखाया गया है. इसमें फाग खेलना और गाने गाना, सबकुछ शामिल है. इस फिल्म ने कई हफ्तों पर बड़े पर्दे पर अपनी पकड़ बना रखी थी.

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यह फिल्म और कोई नहीं बल्कि 1982 में आई फिल्म नदिया के पार है जो आज भी लोगों के दिल में बसी हुई है. यह फिल्म राजश्री प्रोडक्शंस की थी. इसमें मुख्य भूमिका में सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह ने काम किया.

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इस फिल्म में गांव की सादगी, प्यार और होली का मजा बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. फिल्म की शूटिंग बलिया जिले के पास चौबेपुर नाम के गांव में हुई. यह जगह यूपी-बिहार बॉर्डर के करीब है. गांव के लोग आज भी बताते हैं कि फिल्म में दिखाए गए नीम के पेड़, नदी और घर आज भी वैसे ही हैं.

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फिल्म में गांव की ठेठ संस्कृति दिखाई गई. बैलगाड़ी, खेत, नदी पार करना और गांव वाले आपस में मिल-जुलकर रहना, सब कुछ उस जमाने के हिसाब से बिल्कुल असली लगता है. यह फिल्म भोजपुरी अंदाज में बनी थी, इसलिए यूपी और बिहार के लोगों को बहुत पसंद आई.

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फिल्म का सबसे मशहूर गाना है "जोगी जी धीरे धीरे". यह होली का फाग गाना है. इसमें चंद्रानी मुखर्जी, हेमलता और जसपाल सिंह ने गाया है. गाने में होली खेलते हुए लड़के-लड़कियां रंग लगाते हैं, गुलाल उड़ाते हैं और मस्ती करते हैं. यह गाना यूपी की ठेठ या देहाती होली को दिखाता है.

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उत्तर प्रदेश में सिर्फ होली रंगों से नहीं खेली जाती बल्कि फाग गाया जाता है. फाग गाते गाते अबीर-गुलाल मलते हैं. किन्नर नाचते हैं. वहीं देश हो चाहे विदेश, फिल्म का ये गाना होली में जरूर बजता है और लोग इस पर खूब झूमते हैं.

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फिल्म का बजट बहुत कम था, लेकिन कमाई बहुत ज्यादा हुई. यह फिल्म बजट से 30 गुना ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में इसे लोगों ने बार-बार देखा. सिनेमाघरों में हाउसफुल रहता था. यह 1982 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी. इसने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड तोड़े. लोग गांव से शहर तक इसे देखने पहुंचे थे.

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43 साल बीत गए, लेकिन नदिया के पार की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. होली पर यह फिल्म और इसका फाग गाना लोगों को जोड़ता है. यूपी की ठेठ संस्कृति और गांव की मिठास इसमें साफ दिखती है. चौबेपुर गांव आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण है. यह फिल्म बताती है कि सादगी और सच्चा प्यार हमेशा जीतता है.