बिना फ्रिज और बिजली के भी पानी ठंडा रखा जा सकता है. 'सुतकी बोतल' नाम की देसी तकनीक आज भी ग्रामीण इलाकों में इस्तेमाल होती है, जो नेचुरल तरीके से पानी को ठंडा बनाए रखती है.
बिना फ्रिज भी ठंडा पानी संभव

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गर्मी के मौसम में ठंडा पानी हर किसी की जरूरत होती है, लेकिन हर जगह फ्रिज या बिजली मुहैया नहीं होती. ऐसे में पुराने समय की देसी तकनीकें आज भी बेहद काम की साबित होती हैं. इन्हीं में से एक है ‘सुतकी बोतल’, जो बिना बिजली के पानी को ठंडा रखती है.
क्या है सुतकी बोतल?

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सुतकी बोतल एक ट्रेडिशनल देसी तरीका है, जिसमें मिट्टी या खास तरह के कपड़े का इस्तेमाल कर पानी को ठंडा रखा जाता है. ये तकनीक नेचुरल कूलिंग पर आधारित होती है और खासतौर पर गांवों में आज भी इस्तेमाल में लाई जाती है.
कैसे काम करती है ये देसी फ्रिज तकनीक?

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इस तकनीक में बोतल को गीले कपड़े या मिट्टी से ढका जाता है. जैसे-जैसे पानी सूखता है, वाष्पीकरण (evaporation) की प्रोसेस होती है, जिससे तापमान कम होता है और अंदर का पानी ठंडा हो जाता है. वाष्पीकरण के दौरान पानी गर्मी को अपने साथ ले जाता है, जिससे आसपास का तापमान गिरता है.
क्यों है ये तरीका खास?

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ये तरीका पूरी तरह से नेचुरल है और इसमें बिजली की जरूरत नहीं होती. साथ ही ये पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है और बिजली के बिल से भी राहत देता है. भारत के ग्रामीण इलाकों और गर्म क्षेत्रों में ये तकनीक काफी लोकप्रिय है. जहां बिजली की कमी होती है, वहां लोग आज भी इसी देसी फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं.
मिट्टी के बर्तन भी हैं विकल्प

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सुतकी बोतल के अलावा मिट्टी के घड़े (मटका) भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं. इनमें रखा पानी लंबे समय तक ठंडा और टेस्टी बना रहता है. मिट्टी के बर्तन में रखा पानी शरीर के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. ये पानी को नेचुरल तौर से ठंडा करता है, जिससे गले पर भी बुरा असर नहीं पड़ता.
(All Photos Credit: Social Media)