Railway New Rule: ट्रेन से यात्रा के दौरान अपने शराब के शौक को भूल ही जाएं क्योंकि ये आप पर बहुत भारी पड़ सकता है. अच्छा यही होगा की आप भूलकर भी ये गलती न करें. जल्द ही ऐसा कानून लागू होने वाला है, जिसमें अपराध साबित होने पर आपसे पूरे कोच की सफाई कराई जा सकती है.1000 रुपए का जुर्माना या 24 घंटे की जेल हो सकती है. अभी 6 महीने की सजा या पांच हजार रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. यह रेलवे मजिस्ट्रेट तय करेंगे. कानून तो बन गया है. इसको प्रभावी करने की तारीख तय होना शेष है.
रेलवे एक्ट में बदलाव

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कानपुर में रेलवे सुरक्षा बल के प्रभारी ने बताया कि रेलवे एक्ट में यह बदलाव जनविश्वास अधिनियम-2026 के तहत हुआ है. यह कानून आठ अप्रैल को बन गया है. रेलवे ने थानेवार ऐसे मामलों का ब्योरा मांगा है ताकि पता रहे कि रेलवे एक्ट की धारा-145 ए, बी और सी के कितने मामले साल में जोन या पोस्ट स्तर पर दर्ज होते हैं. वीआईपी ट्रेनों जैसे राजधानी, दूरंतो की पैंट्रीकार के अधिकृत वेंडर शराब की सप्लाई करते हैं. पिछले साल इस तरह के 12 मामले पकड़े गए.
कानपुर सेंट्रल पर हर साल 200 मामले

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ट्रेनों से शराब तस्करी और शराब पीकर हंगामे के साल में लगभग 200 मामले होते हैं. बिहार में बंदी होने की वजह से शराब तस्करी के मामले बढ़े हैं. सेंट्रल पर हर साल औसतन 175-180 जेल भी जाते हैं. ट्रेनों के एसी कूपों में नशेबाजी या फिर बैगों में शराब ले जाने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं. शराब पीकर हंगामा करने के 80 फीसदी मामले एसी कूपों में होते हैं. कई बार तो नशेबाजी में छेड़खानी की घटनाएं हुई हैं.
कानपुर रेलवे : व्यस्त जंक्शनों में एक

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कानपुर देश के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शनों में से एक है, जहां से प्रतिदिन औसतन 240 से 250 ट्रेनें गुजरती हैं. रोजाना करीब 1.25 लाख से 1.5 लाख यात्री रेलवे के जरिए सफर करते हैं. आंकड़ों के अनुसार संबंधित रेलवे जोन में हर वर्ष चोरी, लूटपाट और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लगभग 900 से 950 मामले दर्ज किए जाते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि करीब 18 से 20 प्रतिशत घटनाएं ऐसी भी होती हैं, जिनकी आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती.
सुरक्षा और निगरानी भी बड़ी चुनौती

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भारी यात्री संख्या और लगातार रेल संचालन के कारण सुरक्षा और निगरानी भी रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है. रेलवे में होने वाली कुल घटनाओं में लगभग 49 प्रतिशत मामले एसी कोचों में सामने आते हैं, जबकि करीब 22 प्रतिशत घटनाएं रेलवे प्लेटफार्मों पर होती हैं. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी लगातार निगरानी अभियान चलाते हैं तथा यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं.
पूरे देश में लागू होगा यह बदलाव

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एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि जनविश्वास अधिनियम-2026 के तहत कानून बन चुका है. अब भारतीय रेल सहित कई विभागों में हुए बदलाव को एक साथ पूरे देश में लागू किया जाएगा. एक तरह से मामूली आपराधिक कृत्य के मामलों में राहत दी गई है. कुछ मामलों में सजा का प्रावधान खत्म कर जुर्माना ही तय हुआ है. अमल में आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी.