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इस विशाल साम्राज्य की नींव 1887 में केरल के एक छोटे से गांव कोझेनचेरी में निनान मथाई मुथूट ने रखी थी. उन्होंने शुरुआत में अनाज और लकड़ी का छोटा सा व्यापार शुरू किया था जो बाद में देश की सबसे बड़ी गोल्ड लोन कंपनी बना.
क्या मुथूट परिवार को कभी भारी गरीबी देखनी पड़ी?

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साल 1920 के आसपास भारी घाटे के कारण यह परिवार दिवालिया हो गया था और गहरे आर्थिक संकट में फंस गया था. मात्र 15 साल की उम्र में बड़े बेटे को स्कूल छोड़कर मीलों पैदल चलना पड़ा ताकि वे छोटी दुकान चलाकर कर्ज उतार सकें.
लकड़ी के व्यापार से गोल्ड लोन तक का सफर कैसा रहा?

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परिवार ने मजदूरों की मदद के लिए पहले चिट फंड शुरू किया और फिर 1939 में फाइनेंस बिजनेस को औपचारिक रूप दिया. साल 1950 के दशक में उन्होंने सोने के गहनों के बदले लोन देना शुरू किया जो भारतीय बाजार में एक गेम-चेंजर साबित हुआ.
मुथूट के लोगो में दो हाथियों का क्या मतलब है?

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कंपनी के दो हाथियों वाला लोगो उनके पुराने लकड़ी के व्यापार की याद दिलाता है जहाँ हाथी लकड़ियां ढोने का काम करते थे. यह लोगो आज भी उनकी ऐतिहासिक विरासत और मजबूती के प्रतीक के रूप में दुनिया भर में पहचाना जाता है.
केरल से निकलकर कंपनी पूरे भारत में कैसे फैली?

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तीसरी पीढ़ी के एम.जी. जॉर्ज मुथूट ने 1993 में कमान संभाली और बिजनेस को उत्तर भारत सहित विदेशों तक फैलाया. आज इस कंपनी की 7,300 से अधिक शाखाएं हैं जो भारत के साथ साथ यूके और श्रीलंका में भी ग्राहकों को सेवा दे रही हैं.
आज मुथूट परिवार की कुल संपत्ति कितनी है?

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फोर्ब्स के अनुसार मुथूट परिवार की कुल नेटवर्थ करीब 98,700 करोड़ रुपये आंकी गई है. वर्तमान में कंपनी की कमान चौथी पीढ़ी संभाल रही है और शेयर बाजार में इसका मार्केट कैप 1,37,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है.