कैलाश मानसरोवर यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि जीवन की सबसे कठिन और आध्यात्मिक यात्राओं में से एक कहा जाता है. हर साल हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के धाम जाने वाले कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर झील के दर्शन करने की इच्छा रखते हैं. लेकिन यह यात्रा कोई आम यात्रा बिल्कुल भी नहीं है. इस यात्रा को पूरा करने के लिए बेहद साहस की जरूरत होती है. यह यात्रा सुनने में जितनी आसान लगती है उतनी है नहीं. यहां की ऊंचाई, मौसम, सीमाई नियम, परमिट और शारीरिक चुनौतियां इसे बेहद खास बनाती हैं.
भारत-चीन के बीच समझौतों के बाद रूट फिर से आए चर्चा में

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हाल के सालों में भारत सरकार और चीन के बीच समझौतों के बाद कुछ रूट फिर से चर्चा में आए हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैलाश मानसरोवर कैसे पहुंचा जाए, कौन सा रूट सबसे बेहतर है, कितना खर्च आता है और किस मौसम में जाना सबसे सुरक्षित माना जाता है. यदि आप भी इस यात्रा की योजना बना रहे हैं तो पहले सभी जरूरी जानकारियां समझ लेना बेहद जरूरी है.
कहां स्थित है मानसरोवर?

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कैलाश मानसरोवर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (Tibet Autonomous Region) में स्थित है जो चीन के नियंत्रण में है. यही वजह है कि यहां पहुंचने के लिए सिर्फ टिकट बुक कर लेना काफी नहीं होता. यात्रियों को कई तरह के परमिट और सरकारी मंजूरी की जरूरत पड़ती है.
4,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर जाना पड़ता है

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भारत सरकार के जरिए होने वाली आधिकारिक यात्रा हो या नेपाल के रास्ते जाने वाला मार्ग, हर विकल्प के अपने फायदे और चुनौतियां हैं. यात्रा के दौरान 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर जाना पड़ता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से काफी कम होता है. इसलिए सही तैयारी, सही मौसम और सही रूट का चुनाव इस यात्रा की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है.
यात्रा के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

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यात्रियों को वैलिड पासपोर्ट, पासपोर्ट साइज फोटो और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज जमा करने होते हैं. विदेश मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार पासपोर्ट की स्कैन कॉपी और फोटो निर्धारित फॉर्मेट में जमा करनी होती है. इसके अलावा तिब्बत ट्रैवल परमिट, ग्रुप वीजा और अन्य विशेष अनुमतियां भी आवश्यक होती हैं. इन दस्तावेजों की प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं.
कैलाश मानसरोवर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

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विशेषज्ञों के अनुसार मई के मध्य से सितंबर तक का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान तापमान अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है. सड़कें खुली रहती हैं और ऊंचे दर्रों पर बर्फबारी कम होती है. मानसून के दौरान कुछ इलाकों में भूस्खलन की आशंका जरूर रहती है, लेकिन कुल मिलाकर यही अवधि यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है.
भारत सरकार के आधिकारिक रूट कौन-कौन से हैं?

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भारत सरकार विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से दो प्रमुख मार्गों पर कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन करती है. पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा मार्ग है, जो पारंपरिक और अधिक कठिन माना जाता है. इसमें 22 से 25 दिन लग सकते हैं. दूसरा सिक्किम का नाथू ला मार्ग है, जहां अधिकतर यात्रा वाहन से होती है और यह अपेक्षाकृत सुविधाजनक माना जाता है. दोनों मार्गों पर सीमित यात्रियों का चयन सरकारी प्रक्रिया के तहत किया जाता है.