ATM से कैश निकालने वालों को झटका देगी ये खबर, ताजा खुलासे से बढे़गी टेंशन

ATM Cash Crunch: ATM से कैश निकालने का शौक करने वाले ग्राहकों को यह खबर झटका दे सकती है, क्योंकि आने वाले समय में देश की ATM सर्विसेज लड़खड़ा सकती हैं. यानि, एटीएम से कैश जितना चाहेंगे उतना नहीं मिलेगा! जानें क्यों आई यह समस्या?

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ATM Cash Crunch: ATM से कैश निकालने का शौक करने वाले ग्राहकों को यह खबर झटका दे सकती है, क्योंकि आने वाले समय में देश की ATM सर्विसेज लड़खड़ा सकती हैं. यानि, एटीएम से कैश जितना चाहेंगे उतना नहीं मिलेगा! जानें क्यों आई यह समस्या?

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नकदी संकट से जूझ रहे हैं एटीएम

नकदी संकट से जूझ रहे हैं एटीएम2 / 6

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में हुए खुलासे के मुताबिक, देश के एटीएम नकदी संकट से जूझ रहे हैं. एटीएम ऑपरेटर्स की संस्था CATMi की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल के महीनों में बैंकों और करेंसी चेस्ट से एटीएम में डालने के लिए पर्याप्त कैश नहीं मिल पाया. देशभर के एटीएम में कैश की कमी की परेशानी को लेकर एटीएम ऑपरेटर्स की संस्था CATMi ने इंडियन बैंक एसोसिएशन को इसकी जानकारी दी है.

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ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ने से घटी एटीएम ट्रांजैक्शन

ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ने से घटी एटीएम ट्रांजैक्शन3 / 6

जब से बैंक ने फ्री लिमिट के बाद ग्राहकों के लिए प्रति ट्रांजैक्शन चार्ज को बढ़ाकर 23 रुपये कर दिया है तब से लोग डिजिटल पेमेंट के तरीके का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं. इससे एटीएम से ट्रांजैक्शन की संख्या में भी करीब 10.40% की गिरावट आई है. इस संकट को टालने और एटीएम सेवाओं को पूरी तरह से बंद होने से बचाने के लिए CATMi बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक के करेंसी मैनेजमेंट विभाग को मामले में तुरंत दखल देने और कैश फ्लो बढ़ाने का अनुरोध किया है.

CATMi ने क्या दी जानकारी?

CATMi ने क्या दी जानकारी? 4 / 6

ऐसा बताया जा रहा है कैश की कमी के चलते देश के कई राज्यों में ATM सर्विसेज पर असर पड़ सकता है. CATMi ने इसे लेकर IBA (इंडियन बैंक्स एसोसिएशन) को पत्र लिखकर कहा है कि कई राज्यों में ATM में दोबारा कैश भरने के लिए पर्याप्त कैश नहीं मिल रहा है. इसका असर खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों पर पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग कैश ट्रांजैक्शन पर निर्भर रहते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी इसकी जानकारी दी गई.

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मार्च-अप्रैल में दिखी नगदी कम

मार्च-अप्रैल में दिखी नगदी कम5 / 6

इस साल मार्च और अप्रैल के महीने में देश भर के ATMs में कैश की किल्लतें देखी गईं. शायद यही वजह होगी कि एटीएम ट्रांजैक्शन में भी कमी आई है. मार्च में एटीएम के लिए 94000 करोड़ कैश की जरूरत थी, लेकिन मिला सिर्फ 61000 करोड़ यानी कि 64%. इसी तरह से अप्रैल में भी जरूरत के हिसाब से सिर्फ 54000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराया गया. इससे साफ पता चलता है कि देश भर के एटीएम कैश की किल्ल्त से जूझ रहे हैं.

इस स्थिति की वजह क्या है?

इस स्थिति की वजह क्या है?6 / 6

ATM ऑपरेटरों का कहना है कि मौजूदा इंटरचेंज फीस उनकी लागत को पूरा करने के लिए काफी नहीं है. इंटरचेंज फीस वह रकम है, जो एक बैंक दूसरे बैंक के ATM का इस्तेमाल करने के लिए देता है. अभी यह 19 रुपये है. एटीएम में कैश लोड कराने का खर्च बढ़ा है, ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, गार्ड्स की सैलरी में इजाफा किया जा रहा है और कैश ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ATM चलाना और महंगा हो गया है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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