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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP के हाथों करारी शिकस्त मिलने के बाद भी ममता बनर्जी हार मानने को तैयार नहीं हैं. 'दीदी' ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. अब चर्चाएं ये हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लग सकता है और उसके बाद ही आगे के काम किए जा सकते हैं? आइए जानते हैं कि कानून क्या कहता है.
क्या होता है राष्ट्रपति शासन?

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राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 में दिए गए हैं. आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है. ऐसा जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला लें. यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति जैसे कि 'दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो' की दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है. संविधान में इस बात का भी उल्लेख है कि राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के दो महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है. यदि इस बीच लोकसभा भंग हो जाती है तो इसका राज्यसभा द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद नई लोकसभा द्वारा अपने गठन के एक महीने के भीतर अनुमोदन किया जाना जरूरी है.
किन स्थितियों में लागू होता है राष्ट्रपति शासन?

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बता दें किसी भी राज्य में यदि राज्यपाल के तय किए गए समय पर राज्य की विधानसभा में मुख्यमंत्री को नहीं चुना जाता है उस स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है. इसके अलावा यदि राज्य की सत्ता में गठबंधन की सरकार होती है लेकिन विधानसभा में यदि ये गठबंधन अपना बहुमत खो देता है, या गर्वनर द्वारा दिए गए समय के भीतर सीएम सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाता है उस स्थिति में भी राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है.
साथ ही बहुमत नहीं होता है और किसी राज्य की विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है और उसी स्थिति में प्राकृतिक आपदा, महामारी या युद्ध के चलते चुनाव करवाना संभव नहीं हो पाता तो राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है.
ममता बनर्जी इस्तीफा न दें तो क्या होगा?

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भारतीय संविधान के मुताबिक, मुख्यमंत्री का पद राज्यपाल की मर्जी तक बना रहता है. संविधान के आर्टिकल 164 स्पष्ट करता है कि राज्यपाल ही मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं. अगर मुख्यमंत्री चुनाव हार गए हैं या उनकी पार्टी सदन में बहुमत खो चुकी है, लेकिन वो इस्तीफा देने से मना कर दें; तो राज्यपाल का रोल अहम हो जाता है. इस केस में राज्यपाल मुख्यमंत्री और निवर्तमान सरकार को तुरंत बर्खास्त करने का अधिकार रखते हैं. मौजूदा समय में बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि हैं.
अविश्वास प्रस्ताव भी एक तरीका

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राज्यपाल के बर्खास्त करने के अलावा अविश्वास प्रस्ताव भी एक तरीका है, जिससे निवर्तमान मुख्यमंत्री को हटाया जा सकता है. संवैधानिक परंपराओं के तहत इस गतिरोध की स्थिति में राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकते हैं. इसमें अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है. फिर मौजूदा सरकार को बहुमत साबित करना होगा. चुनाव नतीजे के मुताबिक, BJP के पास बहुमत से कहीं ज्यादा नंबर है. इसलिए TMC सरकार का बहुमत साबित करना असंभव है. ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पारित होते ही ममता बनर्जी को हर हाल में इस्तीफा देना होगा.
क्या बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन?

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एक बार राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की पूरी कमान सीधे तौर पर केंद्र और राज्यपाल के हाथों में आ जाती है. ऐसे में मुख्यमंत्री की शक्तियां खत्म हो जाती हैं. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिपरिषद को भंग कर दिया जाएगा. फिर राज्य का प्रशासनिक कामकाज राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल चलाएंगे. मुख्य सचिव या अन्य सलाहकार राज्यपाल के मुताबिक काम करेंगे. राज्य की विधानसभा को या तो निलंबित कर दिया जाएगा या पूरी तरह से भंग कर दिया जाएगा. ऐसे में राज्य के लिए कानून और बजट बनाने का अधिकार संसद के पास आ जाएगा. हालांकि, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद हाईकोर्ट की शक्तियों और कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
कैसे बनेगी नई सरकार?

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राज्यपाल के पास संविधान के आर्टिकल 164 के तहत राज्य में नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने और उसे शपथ दिलवाने की शक्ति होती है. चुनाव में हारने वाली सरकार और CM की बर्खास्तगी के बाद राज्यपाल विधायक दल के नेता को मुख्यमंत्री चुन सकते हैं. इसके बाद नई सरकार बन सकती है. यानी भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन वो जनादेश के बाद पश्चिम बंगाल की CM नहीं रह सकती हैं.