210 साल पुराना लिपुलेख विवाद फिर गरमाया, जानें क्या बोले नेपाल PM बालेन शाह, भारत के मामले में ब्रिटेन की क्यों हुई एंट्री?
भारत और नेपाल के बीच 210 साल पुराना लिपुलेख दर्रा विवाद फिर गरमा गया है। इसकी वजह लिपुलेख दर्रे पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के द्वारा संसद में दिया गया बयान है। उन्होंने लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने के भारत और चीन के फैसले पर आपत्ति जताई है, जबकि गलवान हिंसा के कारण 6 साल बंद होने के बाद इसे खोला जाना है।

बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने लिपुलेख दर्रा विवाद को ब्रिटेन की सरकार के समक्ष उठाने का फैसला किया है, क्योंकि यह विवाद अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। हालांकि भारत ने अपनी मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अगर इस मामले ब्रिटेन दखल देता है तो इससे भारत-नेपाल के साथ-साथ भारत-ब्रिटेन के रिश्ते भी खराब हो सकते हैं।
नेपाल को भारत-चीन के समझौते से आपत्ति क्यों?
2 / 6ताजा मामला भारत और चीन की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने का है। कैलाश मानसरोवर तक जाने के 2 रास्तों में से एक रास्ता उत्तराखंड का लिपुलेख दर्र है। भारत-चीन में हुए समझौते के मुताबिक दोनों देश मिलकर दोनों रास्तों से यात्रा को पूरा कराएंगे, लेकिन क्योंकि नेपाल लिपुलेख दर्रे पर अपना दावा ठोकता है, इसलिए उसने इस रास्ते को यात्रा के लिए न खोलने की बात कही है।
1816 से लिपुलेख दर्रे पर चला आ रहा विवाद?
3 / 6बता दें कि 1816 से लिपुलेख दर्रा विवाद जारी है। यह दर्रा भारत, चीन और नेपाल सीमा से सटा है। यह दर्रा भारत के उत्तराखंड राज्य के धारचूला को तिब्बत के पुरांग से जोड़ता है। इस रास्ते से लंबे समय से चीन और भारत के बीच व्यापार भी होता रहा है, जो पिछले 6 साल से बंद था, लेकिन अब फिर से शुरू हो गया है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए यह रास्ता इस्तेमाल होता है।
दर्रे से बहने वाली काली नदी के उद्गम पर विवाद
4 / 6बता दें कि विवाद भी दर्रे से बहने वाली काली नदी के उद्गम को लेकर है। भारत का दावा है कि काली नदी उत्तराखंड में लिपुलेख के पास से निकलती है। नेपाल का दावा है कि यह नदी नेपाल में लिम्पियाधुरा के पास से निकलती है। 1816 की सुगौली संधि के अनुसार, यह काली नदी भारत और नेपाल के बीच सीमा है। 1865 में बदलाव के बाद सीमा को लिपुलेख दर्रे के पास शिफ्ट कर दिया गया। इससे लिपुलेख का कुछ इलाका भारत के हिस्से में आ गया। इस दर्रे के जरिए भारत और नेपाल 1751 किलोमीटर लंबी सीमा शेयर करते हैं।
2020 में विवाद को लेकर बढ़ गया था विवाद
5 / 6बता दें कि साल 2020 में विवाद के चलते भारत और नेपाल में काली नदी को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया था। क्योंकि उस साल उत्तराखंड में धारचूला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन हुआ था। नेपाल ने एक मैप जारी करके काली नदी, लिपुलेख दर्रे और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया। भारत कहता है कि जो भी सीमा विवाद है, उसको बातचीत के जरिए हल किया जाए। लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह विवाद में ब्रिटेन की मध्यस्थता की बात करने लगे हैं।
लिपुलेख में भारत की मौजूदगी का विरोधी नेपाल
6 / 61954 से लिपुलेख दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीयों के लिए अहम मार्ग रहा है। शुरुआत से ही यह रास्ता भारत सरकार के अधीन रहा है। चीन के साथ युद्ध के बाद इस इलाके में भारत ने अपनी मौजूदगी मजबूत की। साल 2015 में भारत ने इस रास्ते को चीन के साथ व्यापार का मार्ग बनाने का फैसला किया, जिस पर नेपाल ने विरोध जताया। जब भी भारत इलाके में कोई निर्माण करता है तो नेपाल विरोध करता है, जबकि भारत के पास लिपुलेख से जुड़े एतिहासिक प्रमाण हैं।



















