Taj Mahal Iran connection: भारत के आधिकारिक दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की एक तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला दिया है. सोमवार को मार्को रूबियो अपनी पत्नी जेनेट रूबियो के साथ आगरा में दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल का दीदार करने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने ताजमहल के सामने आइकॉनिक 'डायना बेंच' पर बैठकर तस्वीरें भी खिंचवाईं. लेकिन इस खूबसूरत दौरे पर ईरान ने इतिहास के पन्नों को खोलकर एक ऐसा कूटनीतिक तंज कस दिया, जिसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है.
ईरानी दूतावास ने क्या कहा?

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हैदराबाद में ईरान के वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर मार्को रूबियो की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "अगर रूबियो को इतिहास या वास्तुकला की थोड़ी भी जानकारी होती, तो वह इस जगह पर खड़े होकर अपनी तस्वीर कभी नहीं खिंचवाते." दूतावास ने आगे लिखा, "यह ऐतिहासिक स्मारक एक मुगल बादशाह (शाहजहां) ने अपनी ईरानी पत्नी (मुमताज महल) के लिए अपने गहरे प्यार की निशानी के तौर पर बनवाया था. इसे ईरानी वास्तुकारों ने अपनी बेजोड़ कलाकारी से तराशा था. वहीं, दूसरी ओर आज रूबियो की अमेरिकी सरकार ईरानी सभ्यता को मिटा देने की धमकी देती है और बाकी सभ्यताओं का अपमान करती है."
क्या है ताजमहल का 'ईरान कनेक्शन'?

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ईरानी दूतावास का यह गुस्सा इतिहास के ठोस तथ्यों पर आधारित है. ताजमहल का ईरान (पुराना नाम फारस या पर्सिया) से बहुत गहरा और अटूट रिश्ता है: मुमताज महल का फारसी मूल: बादशाह शाहजहां की बेगम मुमताज महल (जिनका असली नाम अर्जुमंद बानू बेगम था) का जन्म भले ही आगरा में हुआ था, लेकिन वह मूल रूप से एक बेहद रईस फारसी (इरानी) कुलीन परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उनके पिता अबुल हसन आसफ खान मुगल दरबार के बड़े सिपहसालार थे और वह प्रसिद्ध मुगल साम्राज्ञी नूरजहां की भतीजी थीं.
ईरानी वास्तुकला की छाप

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इतिहासकारों के मुताबिक, ताजमहल के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे, जिन्हें फारसी मूल का माना जाता है. ताजमहल के निर्माण में मुगल और ईरानी शैली का बेजोड़ मिश्रण देखने को मिलता है. इसके गुंबद, मीनारें और दीवारों पर की गई कैलीग्राफी (कुरान की आयतें) फारसी कला से गहराई से प्रेरित हैं.
अमेरिकी बयानबाजी पर साधा निशाना

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दरअसल, ईरान का यह गुस्सा हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को लेकर है, जिसमें उन्होंने अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान कथित तौर पर ईरानी सभ्यता को खत्म करने की बात कही थी. मार्को रूबियो ने भी हाल ही में ईरान पर वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने का आरोप लगाया था. इसी कूटनीतिक तनाव के बीच जब अमेरिकी विदेश मंत्री ताजमहल पहुंचे, तो ईरान ने इतिहास का आईना दिखाकर वाशिंगटन पर बड़ा राजनीतिक पलटवार कर दिया.