Pan Card New Update: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय नहीं होगी मृतक की उम्र तो जानें अब कैसे होगी? पढ़ें हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस आजकल देशभर में भारतीयों के पहचान पत्र के तौर पर काम आते हैं। पैन कार्ड तो ट्रांजेक्शन करने के लिए अनिवार्य है, लेकिन अब पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस इंसान के मरने के बाद भी बड़े काम आएंगे।

PAN CARD
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जी हां, एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के सबसे बड़े इस्तेमाल के बारे में बताया है। हाई कोर्ट के अनुसार, किसी मृतक की उम्र तय करने के लिए उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को नहीं माना जाएगा, बल्कि पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर भरोसा किया जाएगा।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनुमानित आयु दर्ज

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनुमानित आयु दर्ज2 / 6

राजस्थान हाई कोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो उम्र दर्ज की जाती है, वह अनुमानित होती है, जबकि पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस में सरकारी एजेंसियों द्वारा जो उम्र दर्ज की जाती है, उसे विश्वसनीय माना जाता है और मृतक की उम्र के बारे में पता लगाने के लिए भी उन्हें ही विश्वसनीय माना जाएगा।

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ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर अपील

ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर अपील3 / 6

हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप तनेजा ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। जस्टिस ने लापरवाही और तेज रफ्तार को ड्राइवर की मौत का कारण माना। ट्रक चालक को भी लापरवाही बरतने का जिम्मेदार ठहराया। दोनों ड्राइवर की लापरवाही से हादसा हुआ।

इंश्योरेंस क्लेम के लिए पेश की 2 दलीलें

इंश्योरेंस क्लेम के लिए पेश की 2 दलीलें4 / 6

जस्टिस ने दोनों ड्राइवरों को हादसे का जिम्मेदार ठहराया, इसलिए इंश्योरेंस क्लेम की रकम को भी दोनों में 75:25 के अनुपात में बांटने के फैसले को सही माना। इंश्योरेंस क्लेम करने वालों ने दलील दी कि मृतक की आय अनुमानित है, जबकि इनकम टैक्स रिटर्न में बताई गई आय को आधार माना जाना चाहिए था। दूसरी दलील यह दी कि मृतक की उम्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर 48 बताई गई है, जबकि ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड में उसकी उम्र 41 वर्ष मेंशन है।

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पैन कार्ड-लाइसेंस को सरकारी ID बताया

पैन कार्ड-लाइसेंस को सरकारी ID बताया5 / 6

जस्टिस ने उम्र से जुड़ी दलील को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सिर्फ मौत का कारण बताती है। उसमें डॉक्टर अंदाजे से उम्र दर्ज देता है, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मृतक की उम्र का सही सबूत नहीं माना जा सकता। ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड सरकारी एजेंसियों के द्वारा जारी किए जाते हैं, जिनमें कई अन्य दस्तावेजों के आधार पर उम्र मेंशन की जाती है, इसलिए इनमें दर्ज उम्र को सही माना जा सकता है और इनकी विश्वसनीयता भी अधिक है।

इनकम टैक्स रिटर्न को आय का प्रूफ माना

इनकम टैक्स रिटर्न को आय का प्रूफ माना6 / 6

जस्टिस ने कहा कि मृतक की आय भी उसी साल भरे गए ITR में दर्ज रकम को माना जाना चाहिए, जिस साल उसकी मौत हुई है। इस निर्देश के लिए हाइ कोर्ट ने निधि भार्गव बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। टीओ एंथनी बनाम करवरनन मामले का उल्लेख भी किया। इसके बाद हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को मिलने वाले इंश्योरेंस क्लेम की रकम का दोबारा आंकलन किया गया तो उसमें करीब 15 लाख का इजाफा हुआ।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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