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जी हां, एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के सबसे बड़े इस्तेमाल के बारे में बताया है। हाई कोर्ट के अनुसार, किसी मृतक की उम्र तय करने के लिए उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को नहीं माना जाएगा, बल्कि पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर भरोसा किया जाएगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनुमानित आयु दर्ज

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राजस्थान हाई कोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो उम्र दर्ज की जाती है, वह अनुमानित होती है, जबकि पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस में सरकारी एजेंसियों द्वारा जो उम्र दर्ज की जाती है, उसे विश्वसनीय माना जाता है और मृतक की उम्र के बारे में पता लगाने के लिए भी उन्हें ही विश्वसनीय माना जाएगा।
ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर अपील

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हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप तनेजा ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। जस्टिस ने लापरवाही और तेज रफ्तार को ड्राइवर की मौत का कारण माना। ट्रक चालक को भी लापरवाही बरतने का जिम्मेदार ठहराया। दोनों ड्राइवर की लापरवाही से हादसा हुआ।
इंश्योरेंस क्लेम के लिए पेश की 2 दलीलें

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जस्टिस ने दोनों ड्राइवरों को हादसे का जिम्मेदार ठहराया, इसलिए इंश्योरेंस क्लेम की रकम को भी दोनों में 75:25 के अनुपात में बांटने के फैसले को सही माना। इंश्योरेंस क्लेम करने वालों ने दलील दी कि मृतक की आय अनुमानित है, जबकि इनकम टैक्स रिटर्न में बताई गई आय को आधार माना जाना चाहिए था। दूसरी दलील यह दी कि मृतक की उम्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर 48 बताई गई है, जबकि ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड में उसकी उम्र 41 वर्ष मेंशन है।
पैन कार्ड-लाइसेंस को सरकारी ID बताया

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जस्टिस ने उम्र से जुड़ी दलील को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सिर्फ मौत का कारण बताती है। उसमें डॉक्टर अंदाजे से उम्र दर्ज देता है, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को मृतक की उम्र का सही सबूत नहीं माना जा सकता। ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड सरकारी एजेंसियों के द्वारा जारी किए जाते हैं, जिनमें कई अन्य दस्तावेजों के आधार पर उम्र मेंशन की जाती है, इसलिए इनमें दर्ज उम्र को सही माना जा सकता है और इनकी विश्वसनीयता भी अधिक है।
इनकम टैक्स रिटर्न को आय का प्रूफ माना

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जस्टिस ने कहा कि मृतक की आय भी उसी साल भरे गए ITR में दर्ज रकम को माना जाना चाहिए, जिस साल उसकी मौत हुई है। इस निर्देश के लिए हाइ कोर्ट ने निधि भार्गव बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। टीओ एंथनी बनाम करवरनन मामले का उल्लेख भी किया। इसके बाद हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को मिलने वाले इंश्योरेंस क्लेम की रकम का दोबारा आंकलन किया गया तो उसमें करीब 15 लाख का इजाफा हुआ।