EL Nino Alert: प्रशांत महासागर में अल-नीनो की आधिकारिक शुरुआत के साथ ही भारत पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है. अमेरिका की मौसम एजेंसी 'नोआ' (NOAA) ने गुरुवार सुबह इसका ऐलान किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह और भी ज्यादा मजबूत हो सकता है, जिससे दुनिया भर के मौसम में भारी उलटफेर होने की आशंका है. नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने सभी राज्यों को अल-नीनो के खतरों से सावधान किया है.
क्या होता है एल नीनो?

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सरल भाषा में समझें तो एल नीनो एक प्राकृतिक बदलाव है. यह तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. यह बदलाव आमतौर पर हर दो से सात साल में एक बार देखा जाता है. जब समुद्र की सतह गर्म होती है, तो उसके ऊपर की हवा भी गर्म होकर ऊपर उठती है और पूरी दुनिया के मौसम का चक्र बिगाड़ देती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह साल 1950 के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली एल नीनो हो सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?

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मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एल नीनो के सक्रिय होने से भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. देश में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है और बारिश का तालमेल बिगड़ सकता है. चूंकि हमारे देश में खेती काफी हद तक मानसून के भरोसे चलती है, इसलिए कम बारिश से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा देश के बांधों, तालाबों और भूजल के स्तर में भी कमी आ सकती है. विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि इसका सटीक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि एल नीनो कितना मजबूत होता है.
दुनिया भर में मौसम होगा चरम पर

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एल नीनो की वजह से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मौसम का मिजाज बदलेगा. इसकी वजह से वैश्विक तापमान बढ़ेगा, जिससे गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं. जहां एक तरफ ऑस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिणी अफ्रीका में सूखे के हालात बन सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ तबाही मचा सकती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह साल 1950 के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली एल नीनो हो सकता है.
पीएम मोदी ने राज्यों में जल संरक्षण की अपील की

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पीएम मोदी ने बैठक को संबोधित करते हुए अल-नीनो की स्थितियों से पैदा होने वाले खतरों को लेकर गहरी चिंता जताई. उन्होंने देश को इस बड़े संकट से बचाने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों से अपने-अपने राज्यों में जल संरक्षण (पानी बचाने) के लिए और ज्यादा मजबूत कदम उठाने की अपील की. प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हमें 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करना है, तो केंद्र और राज्यों को ऐसे प्राकृतिक संकटों से निपटने के लिए एक टीम की तरह मिलकर काम करना होगा.
राज्यों को भविष्य के लिए तैयार रहने की भी सलाह

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पीएम मोदी ने नीति आयोग की इस बैठक में केवल मौसम के संकट पर ही बात नहीं की, बल्कि राज्यों को भविष्य के लिए तैयार रहने की भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि राज्यों को जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीक के अवसरों का पूरा फायदा उठाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ साइबर फ्रॉड और ड्रग्स के बढ़ते गलत इस्तेमाल जैसी सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी कड़े इंतजाम करने होंगे.