उमर खालिद 1 जून से 3 जून तक अंतरिम जमानत पर रहेगा। उमर ने दिवंगत चाचा के चेहल्लुम में शामिल होने के लिए बेल मांगी थी। वहीं उसकी बीमार मां की हाल ही में सर्जरी हुई है और वह मां की देखभाल करना चाहता है। एक बेटा होने के नाते उसकी इच्छा का मान रखते हुए हाई कोर्ट ने उसे बेल पर छोड़ने का फैसला किया।
एक से 3 जून तक जमानत पर रहेगा उमर

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जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने उमर खालिद की जमानत याचिका मंजूर की। उमर को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके भरना होगा। वहीं उसे 3 शर्तों पर छोड़ा जाएगा। 1 जून को सुबह 7 बजे से 3 जून को शाम 5 बजे तक उसकी जमानत की अवधि लागू रहेगी। 3 जून को 5 बजते ही पुलिस उसे लेने घर पहुंच जाएगी।
शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश

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दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद को जमानत के 3 दिन में 3 शर्तों का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए हैं। एक से 3 जून के बीच उमर खालिद को दिल्ली-NCR में ही रहना होगा। उसे अपने घर पर ही रहना होगा। वह अपने घर से अस्पताल और अस्पताल से घर तक ही जाएगी। इसके अलावा कहीं और जाने की इजाजत उसे नहीं है।
निचली अदालत ने खारिज की थी याचिका

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उमर खालिद ने निचली अदालत में याचिका दायर करके 22 मई से 5 जून तक 15 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी। लेकिन 19 मई को उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। फिर उमर ने 19 मई के कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने भी उसे सिर्फ 3 दिन की अंतरिम जमानत दी है और जमानत भी शर्तों के साथ दी है।
2 आरोपियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

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वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में आरोपी तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन दोनों को राहत देने के संकेत दिए हैं। दो सदस्यीय पीठ (न्यायमूर्ति आर. अरविंद कुमार और पी. बी. वराले) दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियों की सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए बेल खारिज के आदेश को चुनौती दी गई थी। फैसला आने के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल पर असर डलने की संभावना है।