4 महीने की मासूम को आया कार्डियक अरेस्ट! क्या शिशुओं में भी हो सकती है दिल की यह गंभीर समस्या?

Heart Attack Children: कार्डियक अरेस्ट की समस्या सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों में भी देखी जा रही है. अभी हाल में 4 महीने की बच्ची को कार्डियक अरेस्ट आने का मामला सामने आया था. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर बच्चों को अटैक आने के क्या कारण हो सकते हैं.

Heart attack in children in India
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क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट? Image Credit- News24

Heart Problems In Babies: 4 महीने की मासूम को कार्डियक अरेस्ट आने की खबर से हर पेरेंट्स परेशान हो गए हैं कि आखिर इतने छोटे बच्चों को कार्डियक अरेस्ट कैसे आ सकता है. आमतौर पर लोग कार्डियक अरेस्ट को बढ़ती उम्र या टेंशन लेने की वजह से आता है, लेकिन 4 साल के बच्चे को अरेस्ट आना यकीनन परेशान कर देने वाला है. इसको लेकर कई एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों में भी यह गंभीर समस्या हो सकती है. हालांकि, अगर समय पर पहचान और इलाज ना किया जाए तो परेशानी हो सकती है.

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क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट?

क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट? 2 / 8

बच्चों में भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, क्योंकि कार्डियक अरेस्ट का मतलब होता है कि दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाना. इस दौरान खून का प्रवाह रुक जाता है और दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता.

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कार्डियक अरेस्ट आने के कारण

कार्डियक अरेस्ट आने के कारण 3 / 8

कार्डियक अरेस्ट आने के कारण बड़ों के मुकाबले बच्चों में अलग हो सकते हैं. अक्सर इसके पीछे पैदाइश या सांस की समस्या हो सकती है. इसका पता डॉक्टर बच्चा पैदा होने के बाद आसानी से लगा सकता है.

जन्मजात दिल की बीमारी होना

जन्मजात दिल की बीमारी होना 4 / 8

कुछ बच्चे जन्म से ही दिल की समस्याओं के साथ पैदा होते हैं. इस दौरान दिल में छेद, वाल्व की खराबी या ब्लज सर्कुलेशन अच्छी तरह से नहीं होता तो कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ा सकता है.

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दिल की धड़कन में गड़बड़ी होना

दिल की धड़कन में गड़बड़ी होना 5 / 8

कुछ बच्चों में दिल की धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित हो सकती है. इसे अतालता कहा जाता है जो गंभीर स्थिति में कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकती है.

गंभीर संक्रमण होना

गंभीर संक्रमण होना 6 / 8

बच्चे को निमोनिया, सेप्सिस या दूसरे गंभीर संक्रमण होने की वजह से भी ऐसा हो सकता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा पैदा हो जाती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ सकता है.

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सांस रुकने की समस्या

सांस रुकने की समस्या7 / 8

शिशुओं में लंबे समय तक सांस रुकना या ऑक्सीजन न मिलना भी दिल के कामकाज को प्रभावित कर सकता है. कुछ बच्चों में ऐसे आनुवंशिक विकार हो सकते हैं जो अरेस्ट का कारण बनते हैं.

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? 8 / 8

अगर आपका बच्चा अचानक बेहोश हो जाए या सांस लेने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज ना करें. दूध पीने में परेशानी होती है और बच्चे को भूख कम लगती है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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