Heart Problems In Babies: 4 महीने की मासूम को कार्डियक अरेस्ट आने की खबर से हर पेरेंट्स परेशान हो गए हैं कि आखिर इतने छोटे बच्चों को कार्डियक अरेस्ट कैसे आ सकता है. आमतौर पर लोग कार्डियक अरेस्ट को बढ़ती उम्र या टेंशन लेने की वजह से आता है, लेकिन 4 साल के बच्चे को अरेस्ट आना यकीनन परेशान कर देने वाला है. इसको लेकर कई एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों में भी यह गंभीर समस्या हो सकती है. हालांकि, अगर समय पर पहचान और इलाज ना किया जाए तो परेशानी हो सकती है.
क्या शिशुओं में भी हो सकता है कार्डियक अरेस्ट?

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बच्चों में भी कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, क्योंकि कार्डियक अरेस्ट का मतलब होता है कि दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाना. इस दौरान खून का प्रवाह रुक जाता है और दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता.
कार्डियक अरेस्ट आने के कारण

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कार्डियक अरेस्ट आने के कारण बड़ों के मुकाबले बच्चों में अलग हो सकते हैं. अक्सर इसके पीछे पैदाइश या सांस की समस्या हो सकती है. इसका पता डॉक्टर बच्चा पैदा होने के बाद आसानी से लगा सकता है.
जन्मजात दिल की बीमारी होना

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कुछ बच्चे जन्म से ही दिल की समस्याओं के साथ पैदा होते हैं. इस दौरान दिल में छेद, वाल्व की खराबी या ब्लज सर्कुलेशन अच्छी तरह से नहीं होता तो कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ा सकता है.
दिल की धड़कन में गड़बड़ी होना

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कुछ बच्चों में दिल की धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित हो सकती है. इसे अतालता कहा जाता है जो गंभीर स्थिति में कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकती है.
गंभीर संक्रमण होना

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बच्चे को निमोनिया, सेप्सिस या दूसरे गंभीर संक्रमण होने की वजह से भी ऐसा हो सकता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा पैदा हो जाती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ सकता है.
सांस रुकने की समस्या

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शिशुओं में लंबे समय तक सांस रुकना या ऑक्सीजन न मिलना भी दिल के कामकाज को प्रभावित कर सकता है. कुछ बच्चों में ऐसे आनुवंशिक विकार हो सकते हैं जो अरेस्ट का कारण बनते हैं.
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

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अगर आपका बच्चा अचानक बेहोश हो जाए या सांस लेने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज ना करें. दूध पीने में परेशानी होती है और बच्चे को भूख कम लगती है.