गर्मियों में सीलिंग फैन लगभग हर घर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में से एक होता है. बिजली बचाने के लिए लोग अक्सर पंखे की स्पीड कम कर देते हैं, लेकिन एक छोटी सी बात पर इग्नोर कर देते हैं, वो है पंखे पर जमी धूल की परतें. जो पंखे की कार्यक्षमता को कम करता है.
धूल जमा होने से क्यों बढ़ती है बिजली की खपत?

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खिड़कियों और दरवाजों से आने वाले बारीक धूल के कण धीरे-धीरे पंखे के ब्लेड पर जमा होने लगते हैं. समय के लिए साथ ये परत मोटी हो जाती है. खासकर ब्लेड के किनारों पर धूल जमा होने से उसक बेलेंस हवा काटने की क्षमता प्रभावित होती है. ऐसे में पंखे को पहले जैसी हवा देने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे बिजली की खपत बढ़ सकती है.
हवा कम आने की वजह मोटर नहीं, धूल भी हो सकती है

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अगर पंखा पूरी स्पीड में चल रह है, लेकिन कमरे में पहले जैसी ठंडी हवा महसूस नहीं हो रही, तो इसे वजह ब्लेड पर जमी धूल भी हो सकती है. धूल की मोटी परत हवा के प्रवाह को कम कर देती है. कई लोग इसे मोटर की खराबी समझ लेते हैं, जबकि कई बारि सिर्फ अच्छी तरह सफाई करने से समस्या दूसर हो जाती है.
मोटर पर बढ़ सकता है दबाव

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जब ब्लेड गंदे होते हैं तो पर्याप्त हवा देने के लिए मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर मोटर पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ सकता है. इसलिए नियमित साफी पंखे की बेहतर परफॉर्मेंस और बिजली बचाने के लिए भी जरूरी मानी जाती है.
धूल से पंखा डगमगाने भी लग सकता है

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अगर ब्लेड पर एक जैसी धूल नहीं जमी तो पंखे का बैलेंस बिगड़ सकता है. इसकी वजह से पंखा चलते समय हिलने या डगमगाने लगता है. लगातार कंपन होने से मोटर और माउंटिंग सिस्टम पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

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अगर पंखे से असामान्य आवाज आने लगे, वह जरूरत से ज्यादा हिलने लगे या बार-बार बंद होने लगे, तो इसे सामान्य बात समझकर अनदेखा न करें. अगर स्क्रू ढीले हों या फिटिंग कमजोर हो जाए, तो सुरक्षा का खतरा भी बढ़ सकता है.
समय-समय पर सफाई और जांच है सबसे जरूरी

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पंखे की नियमित सफाई करने से उसकी हवा देने की क्षमता बेहतर बनी रहती है और बिजली की खपत बढ़ने की संभावना भी कम हो सकती है. अगर सफाई के बाद भी कोई समस्या बनी रहे, तो किसी अच्छे टेक्नीशियन से जांच करवाना बेहतर रहेगा.