Bashir Badr के वो 5 मशहूर शेर, जिन्होंने बॉलीवुड के इन कल्ट सीन्स को हमेशा के लिए बना दिया अमर
Bashir Badr Famous Shayari in Bollywood: मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र का आज 91 साल की उम्र में निधन हो गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मशहूर शायर बशीर जी की कई शायरियां बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्मों में इस्तेमाल की गई हैं, जिन्होंने उस सीन को अमर कर दिया. आइए जानते हैं.

Bashir Badr Famous Shayari in Bollywood: मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र का आज 91 साल की उम्र में निधन हो गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मशहूर शायर बशीर जी की कई शायरियां बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्मों में इस्तेमाल की गई हैं, जिन्होंने उस सीन को अमर कर दिया. आइए जानते हैं.
मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र
2 / 7मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र की सादगी से भरी और गहरे अर्थों वाली शायरी ने न सिर्फ मुशायरों को लूटा है, बल्कि बॉलीवुड की कई बेहतरीन फिल्मों और वेब सीरीज के किरदारों में जान फूंकी है. उनके शेर किरदारों के दर्द, अकेलेपन और मोहब्बत को बयां करने का जरिया बने हैं.
फिल्म मसान
3 / 7फिल्म मसान में बशीर बद्र की इस शायरी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. इसमें विक्की कौशल और श्र्वेता त्रिपाठी की मासूम मोहब्बत दिखाई गई है. शायरी है- "यूँही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में रहा करो,वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो।"
फिल्म मसान की दूसरी शायदी
4 / 7इसी फिल्म में बशीर की एक और शायरी ली गई है. जो कुछ इस तरह है- "जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है,आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।"
फिल्म राजी
5 / 7आलिया भट्ट की यह सुपरहिट फिल्म पूरे देश में छाई थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें भी बशीर बद्र की शायरी इस्तेमाल की गई है. शायरी है- "कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।"
वेब सीरीज मिर्जापुर
6 / 7मिर्जापुर एक क्राइम-थ्रिलर सीरीज है, जिसमें बशीर बद्र की शायरी का इस्तेमाल किया गया है. जब गुड्डू भैया या बबलू के सीन में शहर के बदलते मिजाज और रिश्तों में आई दूरियों या अविश्वास को दिखाया जाता है, तो बशीर बद्र का यह शेर बैकग्राउंड के जज्बात को गहराई देता है. शायरी है- "कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो।"
फिल्म हमारी अधूरी कहानी
7 / 7इमरान हाशमी और विद्या बालन की इस फिल्म में ट्रैजिक प्रेम कहानी दिखाई गई है, जिसे बशीर बद्र का शेर और गहरा बना देते हैं. शेर कुछ इस तरह है कि- "उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।"