बॉलीवुड की इन 4 सबसे बोल्ड फिल्मों की खास बात यह है कि यह सभी फिल्में आजकल के जमाने में नहीं बल्कि 90 के दशक में बनाई गईं हैं, जिन्हें उस वक्त तो काफी विरोध झेलना पड़ा. लेकिन अब फिल्म की कला को सराहा जाता है.
भारतीय सिनेमा की बोल्ड फिल्में

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भारतीय सिनेमा जब भी बोल्ड फिल्मों की बात होती है, मीरा नायर, बासु भट्टाचार्य, क्यू और दीपा मेहता जैसे निर्देशकों की चर्चा सबसे पहले की जाती हैं. इन लोगों ने बड़ी बेबाकी के साथ उस समय ऐसी फिल्मों का निर्माण किया, जिस समय लड़का लड़की एक दूसरे बात तक नहीं करते थे.
कौन सी हैं बोल्ड फिल्में?

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बॉलीवुड में बोल्ड या इरोटिक फिल्मों में सबसे पहला नाम- कामसूत्रः ए टेल ऑफ लव आता है, जिसे मीरा नायर ने बनाया था. फिर आस्थाः इन द प्रिज़न ऑफ़ स्प्रिंग (निर्देशक बासु भट्टाचार्य), गंडू (निर्देशक क्यू (Qaushiq Mukherjee)) और फायर (निर्देशक दीपा मेहता) ने बनाया.
कामसूत्रः ए टेल ऑफ लव के बारे में

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साल 1996 में आई यह फिल्म प्राचीन भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो प्यार, जातिगत भेदभाव, ईर्ष्या और शारीरिक संबंधों को दर्शाती है. हालांकि इसके बोल्ड दृश्यों के कारण भारत में इस पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया था, लेकिन इसके शानदार आर्ट डायरेक्शन और संगीत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी काफी तारीफ हुई.
आस्थाः इन द प्रिज़न ऑफ़ स्प्रिंग

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साल 1997 में आई रेखा और ओम पुरी अभिनीत यह फिल्म एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे भौतिकवादी सुख-सुविधाओं और पैसों की चाहत में एक शादीशुदा महिला अनजाने में सेक्स वर्क की ओर कदम बढ़ा देती है. फिल्म बोल्ड दृश्यों के साथ-साथ शहरी समाज के खोखलेपन और आर्थिक दबाव पर एक गंभीर चोट करती है.
गंडू

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साल 2010 में रिलीज हुई यह एक बंगाली ब्लैक-एंड-व्हाइट आर्ट फिल्म है (न कि पारंपरिक बॉलीवुड फिल्म). यह रैप संगीत, युवाओं के भटकाव, ड्रग्स और तीव्र यौन इच्छाओं को बेहद कच्चे और बिना किसी काट-छांट (Explicit) के रूप में दिखाती है. अपने विवादित दृश्यों के कारण इसे भारत में कभी थियेट्रिकल रिलीज नहीं मिली, लेकिन वैश्विक फिल्म फेस्टिवल्स में इसे बहुत चर्चा मिली.
फायर

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साल 1996 में शबाना आज़मी और नंदिता दास अभिनीत यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है. यह समलैंगिकता (Lesbianism) के विषय पर खुलकर बात करने वाली मुख्यधारा की पहली फिल्मों में से थी. रिलीज के वक्त इस फिल्म का भारत में भारी विरोध हुआ था.