आज-कल बच्चों के साथ बड़े लोग भी अपने कामों को आसान बनाने के लिए एआई की मदद ले रहे हैं. अब वो चाहे ऑफिस का काम हो या फिर कोई पर्सनल काम. एआई की मदद हर काम में ली जा रही है. इस बीच AI का इस्तेमाल रिसर्च के कामों में भी लगातार किया जा रहा है. जिसे देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC ने पीएचडी थीसिस की जांच को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं. UGC के अनुसार, अगर किसी भी थीसिस में 10 से 40 प्रतिशत तक नकल पाई जाती है तो उसे संशोधन के लिए वापस कर दिया जाएगा. वहीं, संशोधन के लिए लौटाई गई थीसिस को शोधार्थी छह माह के अंदर सुधार कर फिर से जमा कर सकेंगे.
UGC के नए नियम

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यूजीसी के नियमों के अनुसार यदि किसी थीसिस में 40 से 60 प्रतिशत तक प्लेजरिज्म पाया जाता है, तो शोधार्थी को एक वर्ष तक थीसिस जमा करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा. वहीं यदि साहित्यिक चोरी 60 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो शोधार्थी का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) रद्द किया जा सकता है.
सुपरवाइजर पर भी की जाएगी कार्रवाई

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वहीं, नियमों का उल्लंघन होने पर केवल शोधार्थी ही नहीं, बल्कि उनके पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) पर भी कार्रवाई की जाएगी. यदि किसी थीसिस में बड़े स्तर पर साहित्यिक चोरी पाई जाती है या कोई शोधार्थी बार-बार ऐसा करता है, तो संबंधित सुपरवाइजर को नए शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है. यहां तक कि उनकी सुपरवाइजर मान्यता भी रद्द की जा सकती है.
AI का कहां इस्तेमाल और कहां नहीं?

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार रूटीन कार्यों या व्याकरण संबंधी सुधार के लिए एआई का उपयोग स्वीकार्य होगा, लेकिन इसका उल्लेख शोधार्थियों को अपनी थीसिस में करना होगा. हालांकि शोध के निष्कर्ष, सारांश या डेटा विश्लेषण तैयार करने के लिए एआई से प्राप्त सामग्री का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा. यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को इन नियमों से शोधार्थियों को अवगत कराने का निर्देश दिया है.
पाटलिपुत्र विश्वविद्याल ने पहले ही की थी चर्चा

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वहीं, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (पीपीयू) ने अपनी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस विषय पर पहले ही बात की थी. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी के दिशा निर्देशों के अनुरूप ही शोधार्थियों की थीसिस को साहित्यिक चोरी जांच नीति के तहत स्वीकृति प्रदान की जाएगी.
थीसिस अपलोड करने पर ही पीएचडी की डिग्री

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पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के लिए अब शोधार्थियों को वाइवा परीक्षा के सात दिनों के अंदर अपनी थीसिस को शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. बिहार के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने सभी शोधार्थियों के लिए यह नया नियम लागू कर दिया है. हाल ही में कुलाधिपति ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद पाटलिपुत्र विवि ने भी अधिसूचना जारी कर दी है. नियम का पालन नहीं करने पर पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी और शोधार्थी को डिग्री नहीं मिलेगी.
एक सप्ताह के अंदर फाइनल PhD करनी होगी जमा

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जारी अधिसूचना के अनुसार वाइवा की तिथि से एक सप्ताह के भीतर शोधार्थियों को थीसिस की पीडीएफ फाइल पेन ड्राइव में सुरक्षित कर एक आवेदन पत्र के साथ यूनिवर्सिटी के पीएचडी सेल में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी. इसके बाद ही पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना निर्गत की जाएगी.