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Duvidha 1973 Movie: कुछ अच्छी फिल्में गुमनामी के अंधेरे में गुम हो जाती हैं. लेकिन उसकी कहानी में बड़ा दम होता है. ऐसी ही 1973 में बनी एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें भूत को दुल्हन से इश्क हो जाता है. ऐसी अजीबो गरीब कहानी आपका दिमाग हिलाकर रख देगी.

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कुछ फिल्मों की कहानी बड़ी अनोखी होती है. ऐसी ही 1973 में बनी फिल्म 'दुविधा' का भी हाल है, जो कि समय के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो गई. इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म में भूत को दुल्हन से इश्क हो जाता है. यह फिल्म राजस्थान की लोककथा पर बनी है और आज भी कल्ट क्लासिक मानी जाती है. (Credit- Pinterest)

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निर्देशक मणि कौल ने इसे बहुत खूबसूरती से बनाया, लेकिन यह फिल्म ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंच पाई. क्या आपने इसे देखा है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इसकी कहानी और खासियत. इसे देखकर आप बाकी फिल्में भूल जाएंगे और इसकी कहानी महीनों तक आपके दिमाग में घूमती रहेगी. (Credit- Pinterest)

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फिल्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में शुरू होती है. एक व्यापारी का बेटा अपनी नई दुल्हन लच्छी के साथ घर आता है. शादी के तुरंत बाद ही पति व्यापार के काम से दूर चला जाता है. दुल्हन अकेली रह जाती है. इसी बीच एक भूत दुल्हन को देखता है और उससे प्यार कर बैठता है. (Credit- Pinterest)

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भूत पति का रूप धारण कर घर आ जाता है और दुल्हन के साथ रहने लगता है. असली पति और नकली पति (भूत) में फर्क समझना मुश्किल हो जाता है. दुल्हन दुविधा में पड़ जाती है. क्या वह असली पति को पहचान पाएगी? क्या भूत का प्यार सच है या धोखा? कहानी में रहस्य, डर और भावनाएं बहुत गहराई से दिखाई गई हैं. अंत में बच्चे का जन्म भी होता है, जो और सस्पेंस बढ़ाता है. (Credit- Pinterest)

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मणि कौल ने पारंपरिक बॉलीवुड स्टाइल से अलग हटकर फिल्म बनाई. कोई गाने-नाच नहीं, कोई ड्रामा नहीं. सिर्फ शांत दृश्य, राजस्थान की खूबसूरत लोकेशन और गहरी सिनेमेटोग्राफी. नवरोज़ कॉन्ट्रैक्टर की कैमरा वर्क कमाल की है. (Credit- Pinterest)

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यह फिल्म समांतर सिनेमा का अच्छा उदाहरण है. अभिनेता रवी मेनन और रायसा पदमसी ने मुख्य भूमिका निभाई है. कहानी विजयदान देथा की राजस्थानी लोककथा पर आधारित है. इस फिल्म की अजीबो गरीब कहानी आपको सही गलत के बीच का फर्क सोचने पर मजबूर कर देगी. (Credit- Pinterest)

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रिलीज के समय फिल्म ज्यादा नहीं चली, लेकिन फिल्म प्रेमियों और आलोचकों को बहुत पसंद आई. मणि कौल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. आज यह फिल्म दुर्लभ मानी जाती है और फेस्टिवल में दिखाई जाती है. (Credit- Pinterest)

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यह भूत-प्रेत की कहानी को रोमांस और सामाजिक मुद्दों से जोड़ती है. साथ ही स्त्री की दुविधा और प्यार की जटिलता बहुत अच्छे से दिखाई गई है. अगर आप भी इसी तरह की अलग-थलग फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो यह मूवी आपके लिए ही बनी है. (Credit- Pinterest)