हाल ही में सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या को 9 से घटाकर 4 किए जाने के फैसले ने कई परिवारों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य गरीब परिवारों की मदद कम करना नहीं, बल्कि सिस्टम की उन कमियों को दूर करना है जिनका गलत इस्तेमाल हो रहा था। आइए, समझते हैं कि सरकार ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया और आम उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।
कमर्शियल इस्तेमाल और कालाबाजारी को रोकना है मुख्य मकसद

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सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडरों की संभावित कालाबाजारी और हेरफेर को रोकना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ लोग लाभार्थियों के नाम पर बार-बार रियायती सिलेंडर लेकर उन्हें ऊंचे दामों पर कमर्शियल (व्यावसायिक) जगहों पर बेच रहे थे या अन्य कामों में इस्तेमाल कर रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
खपत के वास्तविक आंकड़ों (Usage Data) के आधार पर तय हुआ कोटा

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सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले अधिकांश गरीब परिवार औसतन साल भर में केवल 4 सिलेंडरों का ही इस्तेमाल करते हैं। अधिकारियों की दलील है कि नया कैप (सीमा) लाभार्थियों के वास्तविक उपभोग के पैटर्न के बिल्कुल अनुकूल है। इसलिए इस कटौती से उन गरीब परिवारों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा जो केवल अपनी घरेलू जरूरतों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
सिलेंडर खरीदने की कोई तय सीमा नहीं, बस 4 के बाद नहीं मिलेगी सब्सिडी

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सरकार ने स्पष्ट रूप से साफ किया है कि लाभार्थियों द्वारा साल में खरीदे जाने वाले सिलेंडरों की कुल संख्या पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। परिवार अपनी जरूरत के हिसाब से जितने चाहें उतने सिलेंडर खरीद सकते हैं। बदलाव सिर्फ इतना है कि सब्सिडी का लाभ केवल पहले 4 रिफिल पर ही मिलेगा। इसके बाद खरीदे जाने वाले अतिरिक्त सिलेंडरों के लिए उपभोक्ताओं को मार्केट का पूरा रेट (Full Price) चुकाना होगा।
सरकारी खजाने पर बोझ कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने की कवायद

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सिलेंडरों के इस डायवर्जन के कारण सरकारी खजाने पर बेकाबू वित्तीय बोझ बढ़ रहा था। कोटे को सीमित करने से सब्सिडी के दुरुपयोग (Leakage) पर लगाम लगेगी और सरकारी पैसा बर्बाद होने से बचेगा। सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तविक जरूरत है।