क्या आपको भी किसी अनजान नंबर या दुकान के QR कोड पर यूपीआई (UPI) पेमेंट करते समय यह डर सताता है कि पैसा सही इंसान के खाते में जा रहा है या नहीं? अब आपकी इस टेंशन को NPCI हमेशा के लिए खत्म करने जा रहा है। 1 जून से यूपीआई पेमेंट सिस्टम में एक ऐसा क्रांतिकारी सुरक्षा फीचर जुड़ने जा रहा है, जिससे गलत या फर्जी नाम से पैसे ऐंठने वाले जालसाजों की दुकान पूरी तरह बंद हो जाएगी। आइए, इन 4 स्लाइड्स के जरिए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नया नियम कैसे काम करेगा और आपको कैसे सुरक्षित रखेगा।
अब स्क्रीन पर दिखेगा असली बैंक वाला नाम, फर्जी निकनेम का खेल खत्म!

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फिलहाल जब आप किसी के मोबाइल नंबर या QR कोड पर पैसे भेजते हैं, तो स्क्रीन पर वही नाम दिखाई देता है जो सामने वाले ने अपने यूपीआई ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm) पर सेट कर रखा होता है। ठग अक्सर इसका फायदा उठाकर फर्जी नाम लिख लेते हैं। अब जैसे ही आप पैसे भेजने के लिए नंबर डालेंगे या स्कैनर का इस्तेमाल करेंगे, आपको सामने वाले व्यक्ति का वही असली नाम (Official Registered Name) दिखाई देगा जो उसके बैंक खाते (Bank Account) में दर्ज है।
QR कोड स्कैन करते ही सामने आ जाएगी जालसाजों की पोल

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आजकल बाजारों और दुकानों में फर्जी या बदले हुए क्यूआर कोड (QR Code) लगाकर धोखाधड़ी करने के मामले काफी बढ़ गए हैं। नए नियम के लागू होने के बाद, आप जैसे ही किसी दुकान या रेहड़ी-पटरी पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, स्क्रीन पर तुरंत उस बैंक अकाउंट होल्डर का नाम फ्लैश हो जाएगा जिसके खाते में पैसा जा रहा है। इससे आप पल भर में पहचान पाएंगे कि क्यूआर कोड असली है या किसी जालसाज का।
गलत अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होने की झंझट से मिलेगी मुक्ति

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कई बार मोबाइल नंबर का एक डिजिटल गलत टाइप होने से पैसे किसी दूसरे अनजान व्यक्ति को चले जाते हैं। अब बैंक-रजिस्टर्ड नाम सामने आने से आप पैसे ट्रांसफर करने का फाइनल 'पिन' (UPI PIN) डालने से पहले ही यह पक्का कर सकेंगे कि आप सही व्यक्ति को ही भुगतान कर रहे हैं। इस पारदर्शिता से यूपीआई इकोसिस्टम में ग्राहकों का भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा।
NPCI का बड़ा लक्ष्य यूपीआई फ्रॉड को जड़ से खत्म करना

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नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इस बदलाव के जरिए देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर और डिजिटल वित्तीय अपराधों (Cyber Financial Crimes) पर लगाम कसना चाहता है। इस नए डिजिटल सिस्टम को सभी बैंकों और यूपीआई ऐप्स के साथ पूरी तरह सिंक कर दिया गया है, ताकि रियल-टाइम में नाम की मैपिंग की जा सके। यह फीचर 1 जून से सभी प्रमुख पेमेंट ऐप्स पर ऑटोमैटिक अपडेट के जरिए काम करना शुरू कर देगा।