भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सिस्टम को आधुनिक और ग्रामीण जरूरतों के अनुकूल बनाने के लिए एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। आरबीआई ने साल 1969 से चली आ रही यानी करीब 57 साल पुरानी 'लीड बैंक योजना' (Lead Bank Scheme) में व्यापक बदलाव करते हुए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था और ग्रामीण इलाकों की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस नए सिस्टम का सीधा और सबसे बड़ा असर देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और महिला उद्यमियों पर पड़ने वाला है। आइए, समझते हैं कि आरबीआई के इस कदम से आम जनता को क्या राहतें मिलने वाली हैं।
57 साल पुरानी लीड बैंक योजना में बदलाव, जानें क्या था पुराना सिस्टम?

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आरबीआई ने जिस व्यवस्था को नए दौर के हिसाब से अपडेट किया है, उसकी शुरुआत बैंकिंग इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण रही है। लीड बैंक योजना की शुरुआत साल 1969 में हुई थी। इसके तहत देश के हर जिले में एक कमर्शियल बैंक को लीड बैंक के रूप में जिम्मेदारी दी जाती है, जो उस पूरे जिले में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार, लोन बांटने और वित्तीय विकास का जिम्मा संभालता है।
बदलाव की क्यों पड़ी जरूरत?

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आरबीआई का मानना है कि अब डिजिटल बैंकिंग के दौर और ग्रामीण क्षेत्रों की बदलती आर्थिक जरूरतों को देखते हुए इस पुराने सिस्टम को अपग्रेड करना बेहद जरूरी हो गया था।
छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर की चमकेगी किस्मत, लोन मिलना होगा आसान

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नई गाइडलाइंस में छोटे स्तर पर व्यापार करने वालों और नए स्टार्टअप्स को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छोटे कारोबारियों और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर पर अपना फोकस बढ़ाएं, ताकि उन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आसानी से लोन मिल सके। गांवों और छोटे शहरों में नया काम शुरू करने वालों को वित्तीय मदद मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अन्नदाताओं के लिए बड़ी राहत: कृषि लोन और ग्रामीण बैंकिंग होगी और मजबूत

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खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए आरबीआई की इस नई व्यवस्था में विशेष प्रावधान किए गए हैं। बैंकों को ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करने और छोटे व सीमांत (Marginal) किसानों तक लोन की पहुंच को और ज्यादा बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। गांवों में बैंकिंग सुविधाएं और कृषि ऋण मजबूत होने से गरीब किसानों को मजबूरी में स्थानीय साहूकारों या महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बैंक शाखा जाने की झंझट होगी कम, गांवों में डिजिटल बैंकिंग पर रहेगा पूरा जोर

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आधुनिक दौर को देखते हुए आरबीआई अब बैंकिंग को पूरी तरह कागजों और दफ्तरों से बाहर निकालकर मोबाइल स्क्रीन तक ले जाना चाहता है। नई गाइडलाइंस के तहत दूरदराज और पिछड़े इलाकों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान (Online Payments) और इंटरनेट वित्तीय जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका मुख्य मकसद लोगों की बैंक शाखाओं (Branches) पर निर्भरता को कम करना है, ताकि ग्रामीण जनता घर बैठे ही अपने मोबाइल से सुरक्षित लेनदेन कर सके।
जिला स्तर पर होगी कड़ी मॉनिटरिंग; महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिलेगी कमान

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नए नियमों के लागू होने के बाद अब बैंकों के कामकाज की निगरानी का तरीका भी पूरी तरह बदलने जा रहा है। अब जिला स्तर पर चल रही बैंकिंग योजनाओं की मॉनिटरिंग को बेहद सख्त किया जाएगा, जिससे तुरंत यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र को ज्यादा पैसों या वित्तीय मदद की जरूरत है। आरबीआई चाहता है कि बैंक विशेष रूप से बिजनेस वुमन (महिला उद्यमियों), नए स्टार्टअप्स और इनोवेटिव आइडियाज पर काम करने वाले युवाओं को आगे बढ़कर लोन दें, ताकि समाज का हर वर्ग आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।