ज्यादातर लोग पैन कार्ड (Permanent Account Number) को सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का एक जरिया मानते हैं। लेकिन वास्तव में यह आपकी जेब और बड़े वित्तीय फैसलों से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अगर आप भी कोई बड़ी खरीदारी, प्रॉपर्टी डील या शेयर बाजार में निवेश करने जा रहे हैं, तो पैन कार्ड को साथ रखना न भूलें। नियमों के मुताबिक, कुछ ऐसे खास वित्तीय ट्रांजैक्शन हैं जहां पैन नंबर देना कानूनी रूप से अनिवार्य है; ऐसा न करने पर आपका लेनदेन तो रुकेगा ही, साथ ही टैक्स विभाग की नजर भी आप पर टेढ़ी हो सकती है। आइए, जानते हैं वे 5 कौन से काम हैं जहाँ पैन नंबर बेहद जरूरी है।
महंगी गाड़ी और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर पैन की सख्त नजर

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अगर आप अपने लिए सपनों का घर या कोई नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन सीमाओं को जरूर याद रखें:
प्रॉपर्टी डील्स: ₹20 लाख से अधिक मूल्य की किसी भी अचल संपत्ति (मकान, दुकान या जमीन) की खरीद या बिक्री करने पर पैन कार्ड देना अनिवार्य है।
गाड़ी की खरीदारी: यदि आप ₹5 लाख से अधिक कीमत की कार या मोटरसाइकिल (Two-Wheeler/Four-Wheeler) खरीद रहे हैं, तो भी आपको पैन नंबर देना होगा।
शॉपिंग और सर्विसेज पर नियम: ₹2 लाख की ये है सीमा

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पैन कार्ड का नियम सिर्फ निवेश या प्रॉपर्टी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आपकी सामान्य खरीदारी पर भी लागू होता है। किसी भी एक लेनदेन (Single Transaction) में यदि आप ₹2 लाख से अधिक के सामान (जैसे सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स) या सेवाएं खरीदते हैं, तो बिलिंग के वक्त पैन कार्ड मांग लिया जाएगा। इस नियम का मुख्य उद्देश्य बड़े नकद लेनदेन को ट्रैक करना और बाजार में काले धन के प्रवाह को रोकना है।
गलत पैन नंबर डाला तो लगेगा ₹10,000 का भारी जुर्माना!

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जल्दबाजी या लापरवाही में कहीं भी गलत वित्तीय जानकारी दर्ज करने से बचें, क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आयकर नियमों के तहत, किसी भी वित्तीय या टैक्स दस्तावेज पर जानबूझकर या गलती से गलत/फर्जी पैन नंबर देने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत नंबर की वजह से आपको टीडीएस (TDS) क्रेडिट क्लेम करने में दिक्कत आएगी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी होगी और आपका केस आयकर विभाग की स्क्रूटनी (Scrutiny) में जा सकता है।
डेटा एनालिटिक्स से ट्रैकिंग: ऐसे नजर रखता है इनकम टैक्स विभाग

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टैक्स विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय कदम की पूरी जानकारी होती है, इसलिए पारदर्शिता बरतें। जब आप इन 5 ट्रांजैक्शन में पैन देते हैं, तो वह डेटा टीडीएस, टीसीएस, एसएफटी (SFT) और आपके एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दर्ज हो जाता है। आयकर विभाग आधुनिक टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए आपकी घोषित आय (Income) और आपके खर्चों (Expenditure) का मिलान करता है। अगर दोनों में बड़ा अंतर मिलता है, तो स्पष्टीकरण के लिए नोटिस आ सकता है।
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