अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए हवाई हमलों और संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। इस भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत में एलपीजी (LPG) की कीमतें सीधे तौर पर क्रूड ऑयल से जुड़ी हैं। आइए जानते हैं कि क्या आपके घर का बजट फिर से बिगड़ने वाला है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

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इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जहां से दुनिया की कुल तेल और गैस सप्लाई का कम से कम 20% हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान और अमेरिका के तनाव के कारण यह समुद्री रास्ता फिर से ब्लॉक होता है, तो दुनिया भर में गैस की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे कीमतें आसमान छू सकती हैं।
क्या घरेलू गैस सिलेंडर महंगा होगा?

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भारत के लगभग 90% घरों में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। जुलाई 2026 के लिए तेल कंपनियों ने इसके दामों में कोई बदलाव नहीं किया था। वर्तमान में यह दिल्ली में ₹942, कोलकाता में ₹968, मुंबई में ₹941.50 और चेन्नई में ₹957.50 पर स्थिर है। हालांकि, क्रूड की लगातार बढ़ती कीमतें आने वाले समय में कंपनियों को दाम बढ़ाने पर मजबूर कर सकती हैं।
कमर्शियल गैस सिलेंडर पर असर

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19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, ढाबों और मॉल में होता है। जुलाई 2026 की शुरुआत में ही इसके दामों में ₹170 से ₹180 तक की बड़ी कटौती की गई थी, जिससे दिल्ली में इसका रेट ₹2,930 और मुंबई में ₹2,885.50 हो गया था। लेकिन कच्चे तेल की नई आग इस राहत को जल्द ही खत्म कर सकती है।
भारत पर कब दिखेगा असर?

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम बढ़ने और भारत में एलपीजी की कीमतें बढ़ने के बीच एक मैकेनिकल लैग (समय का अंतर) होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज बढ़े दाम तुरंत भारत नहीं पहुंचते, बल्कि जब नया क्रूड खरीदा, शिप किया और उसका भुगतान किया जाता है, तब जाकर लागत बढ़ती है। इसलिए घरेलू बाजार पर इसका असर आने वाले कुछ हफ्तों में देखने को मिल सकता है।