भारतीय निवेशकों के बीच अब सिर्फ घरेलू शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट का क्रेज भी तेजी से बढ़ रहा है। कई लोगों को लगता है कि अमेरिकी बाजार (US Stock Market) में निवेश करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये या किसी बड़े विदेशी संपर्क की जरूरत होती है, लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। अब डिजिटल क्रांति के इस दौर में आप घर बैठे अपने स्मार्टफोन से दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के मालिक बन सकते हैं। आइए, समझते हैं कि भारत से अमेरिकी शेयरों में निवेश करने का सही, सुरक्षित और आसान तरीका क्या है।
सही इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का चुनाव

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अमेरिकी बाजार में एंट्री करने के लिए आपको सबसे पहले एक सही माध्यम की जरूरत होती है। आज के समय में भारत के कई बड़े डोमेस्टिक फिनटेक प्लेटफॉर्म्स और ब्रोकरेज ऐप्स निवेशकों को यह सुविधा दे रहे हैं। ये भारतीय ऐप्स अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर आपके लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश का रास्ता पूरी तरह आसान और सुरक्षित बनाते हैं।
डिजिटल अकाउंट ओपनिंग: चुटकियों में पूरी करें KYC प्रक्रिया

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खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस है, जिसके लिए आपको कुछ बुनियादी दस्तावेजों की जरूरत होती है। अपना इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए आपको पैन कार्ड (PAN Card), पहचान प्रमाण पत्र और अपने बैंक खाते की डिटेल देनी होगी। एक बार केवाईसी (KYC) वेरिफिकेशन पूरा होते ही आपका विदेशी निवेश खाता ट्रेडिंग के लिए तैयार हो जाता है।
रुपये को डॉलर में बदलना: जानिए RBI की LRS स्कीम का नियम

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चूंकि अमेरिकी बाजारों में लेन-देन डॉलर ($) में होता है, इसलिए आपको फंड ट्रांसफर का यह नियम जानना चाहिए:
LRS स्कीम: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कोई भी भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक) तक की राशि कानूनी रूप से विदेश भेज सकता है।
सीधा ट्रांसफर: आप अपने भारतीय बैंक खाते से रुपये को डॉलर में बदलकर अपने निवेश खाते (Investment Account) में आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं।
फ्रैक्शनल शेयर्स: बजट है कम? तो भी खरीद सकते हैं महंगे शेयर का एक टुकड़ा!

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अमेरिकी शेयर बाजार की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां आपको पूरा शेयर खरीदने की मजबूरी नहीं होती:
छोटा हिस्सा खरीदने की आजादी: अगर Apple या Tesla जैसी बड़ी कंपनियों के एक शेयर की कीमत आपके बजट से बाहर है, तो आप उस शेयर का एक छोटा सा हिस्सा (Fractional Share) भी खरीद सकते हैं।
मात्र $10 से शुरुआत: आप चाहें तो मात्र 10 या 50 डॉलर लगाकर भी इन दिग्गज कंपनियों में अपनी निवेश यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।
DTAA नियम से मिलती है दोहरे टैक्स से राहत

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विदेशी कमाई पर टैक्स के नियमों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि रिटर्न की सही गणना की जा सके:
कैपिटल गेन टैक्स: अमेरिकी शेयरों को बेचने पर होने वाले मुनाफे पर भारत के नियमानुसार कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। इसके अलावा, वहां से मिलने वाले डिविडेंड (लाभांश) पर अमेरिका में टैक्स कटता है।
DTAA का फायदा: राहत की बात यह है कि भारत और अमेरिका के बीच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) संधि है। इसके चलते निवेशकों को एक ही कमाई पर दो अलग-अलग देशों में दोहरा टैक्स नहीं देना पड़ता।
ग्लोबल इनवेस्टर बनने से पहले इन जोखिमों को भी नोट कर लें:

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अमेरिकी टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव भारतीय बाजार से कहीं ज्यादा तेज हो सकता है। पैसा ट्रांसफर करते समय करेंसी कन्वर्जन कॉस्ट, रेमिटेंस चार्ज और प्लेटफॉर्म की फीस को जरूर जांच लें। अमेरिका और भारत के समय चक्र (Time Zone) अलग होने के कारण ग्लोबल खबरों पर पैनी नजर रखनी होती है। केवल सोशल मीडिया ट्रेंड या नाम देखकर पैसा न लगाएं, कंपनी की बुनियादी स्थिति (Fundamentals) समझकर ही निवेश करें।