केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है। डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर (व्यय विभाग) ने 9 जून को एक विस्तृत रूलबुक जारी करते हुए 'फाइनेंशियल पावर रूल्स (DFPR), 2024' में बड़ा संशोधन किया है। इसके तहत सरकारी खातों में दर्ज होने वाले खर्चों की श्रेणियों (Object Heads) को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। ये नए नियम वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY2027-28) से लागू होंगे। आइए, जानते हैं कि इन बदलावों का आपकी सैलरी, भत्तों और पेंशन पर क्या असर होने जा रहा है।
सरकारी खातों में अब अलग से दर्ज होंगे सैलरी और भत्ते

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नए फ्रेमवर्क के तहत, कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को बहुत ही स्पष्ट और अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सैलरी श्रेणी में अब बेसिक पे (Basic Pay), सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला मानदेय (Honorarium) और इंटर्न्स को दिया जाने वाला स्टाइपेंड (Stipend) शामिल होगा। इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, चिल्ड्रेन्स एजुकेशन अलाउंस, यूनिफॉर्म अलाउंस और रिस्क अलाउंस जैसे सभी अतिरिक्त फायदों को अब एक अलग 'अलाउंस' (Allowances) हेड के तहत रिकॉर्ड किया जाएगा।
पेंशन खर्चों के लिए बनी समर्पित श्रेणी, NPS और UPS भी शामिल

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सरकार ने बजट और वित्तीय रिपोर्टिंग को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पेंशन के वर्गीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। अब पेंशन भुगतान, ग्रेच्युटी (Gratuity), प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्यूशन और रिटायरमेंट/सेवा समाप्ति के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट को इस विशेष कैटेगरी में दर्ज किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत सरकार द्वारा दिया जाने वाला योगदान भी अब इसी समर्पित श्रेणी का हिस्सा होगा।
टूर, विदेश यात्रा और ट्रेनिंग के खर्चों का भी होगा अलग-अलग हिसाब

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नए नियमों में आधिकारिक दौरों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर होने वाले खर्चों को लेकर भी पूरी सफाई दी गई है। भारत के भीतर होने वाले आधिकारिक दौरों को डोमेस्टिक ट्रैवल एक्सपेंस और विदेश दौरों को 'फॉरेन ट्रैवल एक्सपेंस' में डाला जाएगा। इसके अलावा लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) को भी अलग श्रेणी मिली है। कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर होने वाली फीस, वर्कशॉप और सामग्री के खर्च को अलग दर्ज किया जाएगा, लेकिन इसमें यात्रा का खर्च शामिल नहीं होगा।
क्या कर्मचारियों की सैलरी या पेंशन में होगा कोई बदलाव?

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इस आदेश के सामने आने के बाद कर्मचारियों के मन में उठ रहे सबसे बड़े सवाल का जवाब बेहद सीधा है। जी नहीं, कर्मचारियों की सैलरी संरचना, डीए (DA) की दरों, एचआरए (HRA) के नियमों या पेंशन के फायदों में ₹1 का भी बदलाव नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह विशुद्ध रूप से एक अकाउंटिंग और बजट रिपोर्टिंग सुधार है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच खर्चों के वर्गीकरण में एकरूपता (Harmonization) लाना है, ताकि डेटा को आसानी से कंपेयर किया जा सके।