अंतरराष्ट्रीय बाजार से राहत की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इजरायल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम (Ceasefire) समझौते के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। इस समझौते ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे बड़े युद्ध के खत्म होने की उम्मीदों को जगा दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध अधिकारों (War Powers) पर अंकुश लगाने का प्रस्ताव पास होने से भी बाजार का तनाव थोड़ा कम हुआ है।
बड़ी कूटनीतिक हलचल: क्या बातचीत से थमेगा ईरान युद्ध?

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बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कूटनीतिक मोर्चे पर हो रहे बदलाव सबसे अहम हैं। अमेरिकी संसद (House of Representatives) ने एक प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने से रोकने की कोशिश की है। हालांकि, इसे पूरी तरह लागू करने के लिए सीनेट की मंजूरी और ट्रंप के संभावित वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
इसी हफ्ते समझौते के संकेत:

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इन सबके बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद संकेत दिए हैं कि इसी वीकेंड (शनिवार-रविवार) तक ईरान के साथ चल रही बातचीत में कोई बड़ा प्रोग्रेस देखने को मिल सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने भी पुष्टि की है कि वाशिंगटन (अमेरिका) के साथ उनके संपर्क टूटे नहीं हैं। हालांकि बातचीत में कोई बड़ा चमत्कार अभी नहीं हुआ है, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे द्वारा भेजे गए दस्तावेजों (Draft Texts) का अध्ययन कर रहे हैं।
घट रहा है अमेरिका का तेल भंडार

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भले ही शांति समझौते की उम्मीद से आज दाम गिरे हैं, लेकिन यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के मुताबिक, 29 मई को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका का कच्चा तेल भंडार 8 मिलियन बैरल घटकर 433.7 मिलियन बैरल रह गया है। विश्लेषकों ने केवल 4 मिलियन बैरल की गिरावट का अनुमान लगाया था।
कीमतों में उछाल का डर अब भी बरकरार

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कंसलटेंसी फर्म हैतोंग फ्यूचर्स (Haitong Futures) का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के स्टॉक में आ रही इस तेजी से कमी (सप्लाई-डिमांड मिसमैच) के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतें फिर से ऊपरी स्तरों की तरफ भाग सकती हैं।